सागर, 06 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर विश्वविद्यालय एवं देवरी कस्बे में आज यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए प्रावधानों और बिल के समर्थन में रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लोगों ने शिरकत की। जहाँ एक ओर प्रदर्शनकारी इसे अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा बता रहे हैं, वहीं रैली के दौरान लगे नारों और उग्र तेवरों ने सामाजिक खाई और राजनीतिक ध्रुवीकरण की चर्चाओं को हवा दे दी है।

रैली या शक्ति प्रदर्शन? राजनैतिक रंग में रंगा आंदोलन

सागर विश्वविद्यालय में कुलपति को बिल के समर्थन में ज्ञापन सौंपा गया तो दूसरी ओर देवरी की सड़कों पर निकली इस रैली का उद्देश्य यूजीसी बिल को सख्ती से लागू करने की मांग करना था। देवरी में राष्ट्रपति के नाम बिल के पक्ष में एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों और जानकारों का कहना है कि यह आयोजन किसी शैक्षणिक सुधार की मांग से अधिक एक राजनैतिक शक्ति प्रदर्शन जैसा ज्यादा नजर आ रहा था। रैली में शामिल भीड़ का जोश और अनुशासन किसी मंझे हुए राजनैतिक दल के कैडर की याद दिला रहा था।
विवादास्पद नारे: सामान्य वर्ग को टारगेट करने के आरोप
रैली के दौरान सबसे अधिक चर्चा उन नारों की रही, जो सीधे तौर पर सामान्य वर्ग (General Category) को निशाना बनाते हुए सुनाई दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ नारों की शब्दावली बेहद आक्रामक थी, जिससे समाज के दो वर्गों के बीच वैमनस्य बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। आलोचकों का तर्क है कि शैक्षणिक नीतियों पर चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि किसी विशेष वर्ग को अपमानित करके।
क्या है विवाद की जड़?
यूजीसी के नए नियमों को लेकर देश भर में बहस जारी है। SC/ST/OBC वर्गों का मानना है कि नए बिल के माध्यम से विश्वविद्यालयों में बैकलॉग पदों को भरने और आरक्षण को सही ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी। उच्च शिक्षा के संस्थानों में इन वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
वहीं, दूसरी ओर एक बड़ा तबका इसे ‘प्रतिभा के साथ समझौता’ और ‘समाज को बांटने वाली नीति’ करार दे रहा है। सामान्य वर्ग के युवाओं में यह डर है कि इन नियमों से उनके अवसर और कम हो जाएंगे, जिससे दोनों पक्षों के बीच की खाई गहरी होती जा रही है।
सामाजिक ताने-बाने पर प्रभाव
सागर एवं देवरी जैसी जगहों पर इस तरह के प्रदर्शन बताते हैं कि अब आरक्षण और नीतिगत बदलाव केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे धरातल पर सामाजिक ध्रुवीकरण का कारण बन रहे हैं। जिस तरह से शैक्षणिक बिल के बहाने वर्गों के बीच दूरी पैदा की जा रही है, वह भविष्य के सामाजिक सौहार्द के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
वहीं प्रशासन ने रैली को शांतिपूर्ण बताया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर भाषाई मर्यादा को लेकर बहस छिड़ गई है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन विरोधों और समर्थनों के बीच कैसे संतुलन बिठाती है।
हिन्दुस्थान समाचार/मनीष कुमार चौबे
—————
हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा
