अररिया 14 मार्च(हि.स.)।

कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सात दिवसीय मधुबनी चित्रकला कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन शनिवार को किया गया। कार्यशाला 08 मार्च से आयोजित था। जिसका उद्देश्य बालिकाओं को पारंपरिक कला से जोड़ते हुए उनकी सृजनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना था।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 30 बालिकाओं ने भाग लिया। पूरे प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिभागियों ने अत्यंत लगन और रुचि के साथ मधुबनी चित्रकला की विभिन्न शैलियों, विषयों और तकनीकों को सीखा। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से परिचित कराने के साथ-साथ इस लोक कला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।
कार्यशाला में ललित कला की शिक्षिका श्रद्धा सुमन ने प्रतिभागियों को मधुबनी चित्रकला की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने चित्रांकन की पारंपरिक शैली, प्राकृतिक एवं पारंपरिक रंगों के उपयोग, रेखांकन की विधि, विभिन्न प्रतीकों एवं आकृतियों के महत्व तथा आधुनिक संदर्भ में मधुबनी कला के प्रयोग के बारे में विस्तार से प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने भगवान-देवताओं, प्रकृति, सामाजिक विषयों तथा पारंपरिक मिथिला संस्कृति से जुड़े अनेक सुंदर चित्र बनाए।
इस अवसर पर शिक्षिका शाइस्ता ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन एवं प्रतिभागियों के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। उनके सहयोग से प्रतिभागियों को चित्रकला की तकनीकों को समझने और अपने चित्रों को बेहतर बनाने में सहायता मिली।
कार्यशाला के अंतिम दिन आयोजित समापन समारोह में प्रतिभागियों द्वारा बनाए गए चित्रों की एक छोटी प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे उपस्थित लोगों ने काफी सराहा। समापन समारोह के अवसर पर सभी प्रतिभागियों को उनके सफल प्रशिक्षण के उपलक्ष्य में प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर
