एसीपी छवि शर्मा के नेतृत्व में एसआईटी का गठन, इंजेक्शन का एंगल जांच के दायरे में

जोधपुर, 31 जनवरी (हि.स.)। कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के मामले में पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इस टीम का नेतृत्व एसीपी छवि शर्मा कर रही है। इसके अलावा एसआईटी टीम में एसआईटी टीम में बोरानाडा थानाधिकारी शकील और साइबर एक्सपर्ट को भी शामिल किया गया है।
एसआईटी की प्रमुख एसीपी छवि शर्मा ने बताया कि पूछताछ के दौरान कंपाउंडर देवी सिंह ने स्वीकार किया है कि उसने साध्वी को सिर्फ एक नहीं बल्कि एक से अधिक इंजेक्शन दिए थे। हालांकि इन इंजेक्शनों की प्रकृति, दवाओं के नाम और उनकी मात्रा को लेकर जांच अभी जारी है। इसके अलावा देवी सिंह की डिग्री और बैक ग्राउंड की भी पड़ताल की जा रही है। एसआईटी का कहना है कि इस मामले से जुड़ा हर व्यक्ति फिलहाल शक के दायरे में है, और किसी भी एंगल को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। छवि शर्मा ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने में अभी समय लग सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पडऩे पर साध्वी के पिता से भी पूछताछ की जाएगी।
एसआईटी की जांच सिर्फ मेडिकल एंगल तक सीमित नहीं है। आश्रम से जुड़े सभी बैंक खातों की जांच की जा रही है। इसके साथ ही आश्रम से जुड़े व्यक्तियों के व्यक्तिगत खातों की भी गहन पड़ताल की जा रही है, जिससे किसी तरह के संदिग्ध लेनदेन का पता लगाया जा सके। फिलहाल एसआईटी मेडिकल, आर्थिक और परिस्थितिजन्य सभी पहलुओं को जोडक़र मामले की जांच कर रही है, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को इस पूरे केस की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। एसआईटी ने कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित को सीआरपीसी की धारा 94 के तहत नोटिस दिया है। उसकी नर्सिंग डिग्री और उससे जुड़े सभी दस्तावेज मांगे गए हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि उनकी डिग्री सही है या नहीं, और क्या उन्हें इंजेक्शन देने का अधिकार था या नहीं। नोटिस में देवी सिंह से यह भी पूछा गया है कि उन्होंने कौन सी दवाएं दीं, कितनी मात्रा में दीं और दवाएं कहां से लाई गई थीं। उनके मोबाइल नंबर और कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी जांच में शामिल किए गए हैं।
एसआईटी ने प्रेक्षा अस्पताल को भी धारा 94 के तहत नोटिस जारी किया है। अस्पताल से इलाज से जुड़े सभी कागजात, मरीज का मेडिकल रिकॉर्ड और घटना वाले दिन का सीसीटीवी फुटेज मांगा गया है। इससे यह पता लगाया जा रहा है कि साध्वी प्रेम बाईसा को अस्पताल किस हालत में लाया गया था, और वहां क्या हुआ? फॉरेंसिक जांच को भी अहम माना जा रहा है। एफएसलए को भेजे गए सभी पत्रों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है, जिससे यह साफ हो सके कि विसरा और अन्य सैंपल सही समय पर और सही तरीके से भेजे गए थे या नहीं।
इसके साथ ही चल और अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी जांच में शामिल हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि किसी तरह का संपत्ति विवाद या आर्थिक दबाव तो इस मामले से जुड़ा नहीं था। आयकर से जुड़े मामलों की भी पड़ताल हो रही है। आईटीआर और अन्य आय स्रोतों को देखकर आय और खर्च में किसी गड़बड़ी की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां साध्वी प्रेम बाईसा की हाल की यात्राओं की जानकारी भी जुटा रही है। कहां गई, किन लोगों से मिलीं, और किन जगहों पर उनका आना जाना रहा। डिजिटल जांच के तहत कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरनेट इस्तेमाल और सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच की जा रही है। मोबाइल डेटा और ऑनलाइन गतिविधियों को खंगाला जा रहा है।
सोशल मीडिया से जुड़े डिवाइस और अकाउंट्स की भी जांच हो रही है। खास तौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि मौत से पहले या बाद में पोस्ट किसने, कब और किस डिवाइस से किया। इसके अलावा आश्रम में मौजूद लोगों के बयान भी लिए जा रहे हैं। इसमें आश्रम स्टाफ, सेवादार, अनुयायी और घटना के दिन वहां मौजूद अन्य लोग शामिल हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश
