सूरजपुर, 20 मार्च (हि.स.)। सूरजपुर के शासकीय नवीन महाविद्यालय, प्रेमनगर में आज शुक्रवार को आयोजित इको टूरिज्म कार्यशाला ने विद्यार्थियों को पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन का व्यावहारिक दृष्टिकोण दिया। चौथे दिन का सत्र “छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास के नए आयाम” विषय पर केंद्रित रहा, जिसमें सतत विकास की अवधारणा को प्रमुखता से रखा गया।

राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान के अंतर्गत शासकीय नवीन महाविद्यालय, प्रेमनगर में आयोजित पांच दिवसीय “इको टूरिज्म” कार्यशाला के चौथे दिन का सत्र “छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास के नए आयाम” विषय पर आयोजित हुआ। यह सत्र विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा, जिसमें पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. एच.एन. दुबे ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में नगर पंचायत अध्यक्ष सुखमनिया जगते और विशिष्ट अतिथि के रूप में उपाध्यक्ष आलोक साहू उपस्थित रहे। विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. अखिलेश द्विवेदी, डॉ. अखिलेश पांडे और विनोद साहू ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन सह संयोजक हीरालाल सिंह ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती और छत्तीसगढ़ महतारी के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई। इसके बाद छत्तीसगढ़ी राज्य गीत के सामूहिक गायन ने वातावरण को सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। अतिथियों का स्वागत तिलक, बैच और पुष्पगुच्छ के साथ किया गया।
स्वागत उद्बोधन में रेखा जायसवाल ने पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बताते हुए कहा कि पर्यटन का विकास प्रकृति के संतुलन को ध्यान में रखकर ही होना चाहिए। उन्होंने “ग्रीन डेवलपमेंट” और जिम्मेदार पर्यटन की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्राचार्य डॉ. दुबे ने कहा कि सरगुजा संभाग के चुनिंदा महाविद्यालयों में इस कार्यशाला का आयोजन होना गौरव का विषय है। उन्होंने क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाओं की ओर संकेत करते हुए विद्यार्थियों को इसे रोजगार के अवसर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
आलोक साहू ने स्थानीय प्रशासन द्वारा पर्यटन विकास के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि विकास के नाम पर प्राकृतिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाना दीर्घकाल में हानिकारक सिद्ध होगा।
मुख्य वक्ता डॉ. अखिलेश द्विवेदी ने पर्यटन और पर्यावरण के संबंध को वैज्ञानिक और संवैधानिक दृष्टिकोण से समझाते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि पर्यटन स्थलों पर बढ़ती मानवीय गतिविधियों से भूमि, जल और जैव विविधता पर दबाव पड़ता है, जिसे संतुलित करना आवश्यक है। उन्होंने “सस्टेनेबल टूरिज्म” को भविष्य का मार्ग बताते हुए संसाधनों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया।
विषय विशेषज्ञ विनोद साहू ने पर्यटन को रोजगार और आर्थिक विकास का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि यह एक व्यापक उद्योग है, जिसमें परिवहन, होटल प्रबंधन, टूर गाइड, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यटन क्षेत्र में कौशल विकसित कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
द्वितीय सत्र में डॉ. अखिलेश पांडे ने मानव और प्रकृति के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अनियंत्रित विकास के कारण जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता में कमी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने इको टूरिज्म को विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बताया और संसाधनों के सीमित उपयोग पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक सचिव हरिशंकर ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के सफल संचालन में रविशंकर उर्रे, मनबोध कुजूर, जयशंकर, अमित कुमार, शेषनन्दन टेकाम, डंकेश्वर वर्मन, सोनाली किंडो, पुनीता राजवाड़े, अन्नू सिंह, डॉ. संजय वर्मा, सुभिया सिंह, किशुन और चंद्रशेखर सहित अन्य सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।
कार्यशाला में पंजीकृत 50 प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और प्रभावी बनाया। यह सत्र विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक और जागरूक पर्यटक बनने की प्रेरणा भी दे गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय
