कानपुर, 14 मार्च (हि.स.)। स्वास्थ्य सेवाओं और औषधि विकास के क्षेत्र में सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक नवाचार, अनुसंधान और बहु-विषयी सहयोग अत्यंत आवश्यक है। ऐसे सम्मेलन वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को अपने शोध कार्य साझा करने और नई संभावनाओं पर विचार करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। यह बातें शनिवार को डॉ. नितिन चित्रांशी ने कहीं।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़ द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल्स में सतत विकास लक्ष्यों के लिए नवाचार रणनीतियां: औषधि खोज और विकास को आगे बढ़ाना” का सफल समापन हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने ऑनलाइन तथा ऑफलाइन माध्यम से भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं और औषधि विकास के क्षेत्र में नई तकनीकों और शोध पर चर्चा के लिए साझा मंच उपलब्ध कराना था।
दूसरे दिन आयोजित आमंत्रित व्याख्यान सत्र में कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने अपने विचार रखे। यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया के डॉ. नितिन चित्रांशी ने ग्लूकोमा के उपचार में अगली पीढ़ी की नेत्रीय उपचार पद्धतियों पर व्याख्यान दिया और जीन थेरेपी तथा पेप्टाइड आधारित दवा वितरण प्रणालियों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन, जम्मू के डॉ. शशांक सिंह ने प्राकृतिक उत्पादों को कैंसर लक्षित औषधियों में परिवर्तित करने की रणनीतियों पर व्याख्यान दिया। वहीं सीएसआईआर राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के डॉ. च. वी. राव ने डेंगू वायरस के विरुद्ध पौधों से प्राप्त नए फाइटोमॉलिक्यूल्स की एंटीवायरल क्षमता पर अपने शोध कार्य को प्रस्तुत किया।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में कई शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के समापन अवसर पर ओरल और पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए फार्मा क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सम्मेलन में 300 से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता रही।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
