चंडीगढ़, 02 मार्च (हि.स.)। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये बजट नहीं, बल्कि कोरी भाषणबाजी है, जिसमें कुछ भी हकीकत नहीं, सिर्फ लफ्फाजी है। हुड्डा ने कहा कि बीजेपी ने हरियाणा को 5.56 लाख करोड़ के कर्जे तले दबा दिया है। क्योंकि 2026-27 के बजट के अनुसार आंतरिक ऋण 3,91,435 करोड़ रुपये है। छोटी बचतें अनुमानित 50,000 करोड़ रुपये हैं, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम 68,995 करोड़ (2025-26 के अनुसार), और अतिरिक्त देनदारियां (बिजली बिलों का बकाया व सब्सिडी) 46,193 करोड़ हैं। यानी कुल राज्य पर कुल ऋण लगभग 5,56,623 करोड़ रुपये पहुंच चुका है, जो भारी वित्तीय दबाव और अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत को दिखाता है।

लाडो लक्ष्मी योजना पर बोलते हुए हुड्डा ने कहा कि राज्य में 18 से 60 वर्ष की आयु की महिलाओं की अनुमानित संख्या 8,250,000 (82.5 लाख) है। यदि इस योजना के तहत प्रत्येक महिला को प्रति माह 2,100 रुपये की भत्ता दिया जाए, तो पूरे वर्ष (12 महीने) के लिए कुल अनुमानित राशि लगभग 20,790 करोड़ रुपये (लगभग 20,000 करोड़) बनती है। लेकिन 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए केवल 6,500 करोड़ रुपये ही प्रावधान किए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बजट में उपलब्ध राशि से केवल लगभग 31.25 प्रतिशत महिलाओं को ही कवर किया जा सकता है, यानी करीब 67.5% महिलाओं को इस योजना से बाहर रखा गया है या उन्हें लाभ नहीं मिल पाएगा।

राज्य का नया बजट 2,23,658 करोड़ रुपये का है, जो पिछले वर्ष 2025-26 के 2,05,017 करोड़ रुपये के बजट से 9 प्रतिशत अधिक है। लेकिन राज्य में मुद्रास्फीति दर लगभग 5 प्रतिशत होने के कारण वास्तविक वृद्धि मात्र 4% के आसपास ही है। यानी 10 प्रतिशत बढ़ोत्तरी का दावा पूरी तरह भ्रामक है।
बजट के मुताबिक सरकार आंतरिक ऋण 76,250 करोड़ रुपये उठा रही है, जबकि ऋण चुकौती (मूलधन 36,101 करोड़ + ब्याज 29,566 करोड़) कुल 65,667 करोड़ रुपये है। इससे अन्य व्यय के लिए मात्र 10,593 करोड़ रुपये ही बच पाते हैं।
शिक्षा के लिए 22,914 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं (प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा सहित), जो कुल बजट का मात्र 6.2 प्रतिशत है। यह जीएसडीपी का केवल 1.9 प्रतिशत है, जबकि नई शिक्षा नीति में शिक्षा पर 6 प्रतिशत व्यय की सिफारिश की गई है।
स्वास्थ्य के लिए 14,007 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जो कुल बजट का मात्र 6.2 प्रतिशत है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के अनुसार बजट व्यय का कम से कम 8 प्रतिशत स्वास्थ्य पर होना चाहिए। साथ ही, यह जीएसडीपी का केवल 1.1 प्रतिशत है, जबकि नीति में 2.5 प्रतिशत की आवश्यकता बताई गई है।
कृषि पर व्यय कुल व्यय का मात्र 4.8 प्रतिशत है, जबकि राज्य की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है।
यह स्थिति कृषि क्षेत्र की उपेक्षा को दर्शाती है।
जहां तक पूंजीगत व्यय की बात है तो ऋण चुकाने और तमाम अग्रिम भुगतानों के बाद पूंजीगत व्यय के लिए केवल 21,756 करोड़ रुपये बचते हैं, जो कुल बजट का मात्र 9.7 प्रतिशत है। ये नए मेडिकल कॉलेज, सड़कें, पुल और बजट में घोषित अन्य परियोजनाओं के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं हैं।
कुल व्यय में पूंजीगत व्यय मात्र 28 प्रतिशत है, जबकि उधार ली गई राशि का अधिकांश हिस्सा चालू खपत और पुराने ऋण चुकाने में उपयोग हो रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा
