हुगली, 13 मार्च (हि. स.)। जिले के हरिपाल ब्लॉक कृषि कार्यालय के सामने शुक्रवार को किसानों की लंबी कतारें देखी गईं। यहां किसानों से आलू खरीदने के लिए टोकन वितरण की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसके बाद आलू को कोल्ड स्टोरेज में जमा किया जाएगा।

मिली जानकारी के अनुसार, इन टोकनों के आधार पर किसानों का आलू हिमघर में रखा जाएगा और बाद में राज्य सरकार उसी आलू को खरीदेगी। हालांकि किसानों को भुगतान कब मिलेगा, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।
राज्य में इस वर्ष आलू की कीमतें काफी नीचे चली गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों से सहायक मूल्य पर आलू खरीदने का निर्णय लिया है। सरकार ने 50 किलोग्राम की एक बोरी आलू के लिए 475 रुपये का मूल्य तय किया है।
वर्तमान में खुले बाजार में आलू की कीमत 150 से 220 रुपये प्रति बोरी के बीच बताई जा रही है, लेकिन वहां भी किसानों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। व्यापारियों द्वारा किसानों से आलू खरीदने में अनिच्छा दिखाई जा रही है।
सरकारी योजना के तहत एक किसान से अधिकतम 70 बोरी आलू खरीदे जाने की बात कही गई है, जबकि इससे अधिक उत्पादन का क्या होगा, इसे लेकर किसानों में चिंता बनी हुई है।
किसानों का कहना है कि एक बोरी आलू उत्पादन में लगभग 375 रुपये का खर्च आता है। इसके अलावा खेत से आलू निकालने, छंटाई करने, पैकिंग और कोल्ड स्टोरेज तक पहुंचाने में करीब 75 रुपये का अतिरिक्त खर्च होता है। इस तरह एक बोरी आलू पर कुल लागत लगभग 450 रुपये पड़ती है।
सरकार द्वारा तय किए गए 475 रुपये प्रति बोरी के सहायक मूल्य पर किसानों को मात्र 25 रुपये का लाभ मिलता है। किसानों का कहना है कि तीन महीने में 35 से 40 हजार रुपये खर्च करने के बाद इतना कम मुनाफा उनके लिए पर्याप्त नहीं है।
कई किसानों ने कहा कि मौजूदा सहायक मूल्य से उनकी आर्थिक समस्या का समाधान नहीं होगा। सहायक मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर कुछ किसान आंदोलन भी शुरू कर चुके हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय
