चंडीगढ़, 06 मार्च (हि.स.)। हरियाणा में चल रहे उद्योगों में नौकरी के समय हरियाणावी मूल के युवाओं को आरक्षण प्रदान करने के संबंध में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने पर सरकार उसे लागू करेगी। हरियाणा के उद्योग मंत्री राव नरबीर ने शुक्रवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान बादली के विधायक कुलदीप वत्स के सवाल पर यह जानकारी दी।

कुलदीप आज सदन में नहीं थे, जिसके चलते उन्होंने अपना सवाल पूछने के लिए झज्जर की विधायक गीता भुक्कल को अधिकृत किया था।
गीता भुक्कल ने बादली हलके में चल रही विदेशी कंपनियों में हरियाणा के युवाओं को नौकरियां प्रदान करने के मुद्दे को उठाया।
उन्होंने कहा कि कंपनियों द्वारा जमीनें ले ली जाती हैं और उसके बाद स्थानीय युवाओं को नौकरी नहीं दी जाती है। हरियाणा की जमीन पर उद्योग लगाने वाले उसी जमीन मालिक के बच्चों को उद्योगों में घुसने तक नहीं देते। गीता भुक्कल ने हरियाणवी मूल के युवाओं को उद्योगों में आरक्षण पर भी सरकार से जवाब मांगा।
उद्योग मंत्री राव नरबीर ने कहा कि पूर्व मनोहर सरकार के समय में उद्योगों में 75 प्रतिशत आरक्षण का नियम पास किया गया था। जिसे हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उद्योगपति हरियाणा के युवाओं को रोजगार दें, इसके लिए आगामी सत्र से इंसेटिव योजना लागू की जा रही है। उन्होंने बताया कि पहले सरकार द्वारा हरियाणा के युवा को नौकरी देते समय 48 हजार रुपये सालाना आर्थिक मदद दी जाती थी। अब सरकार ने इस राशि को बढ़ाकर एक लाख रुपये सालाना कर दिया है। इसे नए सत्र से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बादली औद्योगिक क्षेत्र के दायरे में चल रही ऑटो लीफ कंपनी में कुल 1045 कर्मचारियों में से 527, डेंसो में 1120 में से 790, टीसीआई में 645 में से 75 तथा अंबर में 1440 मेंसे 335 हरियाणवी युवाओं को नौकरियां प्रदान की गई हैं। अब सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि बढ़ाए जाने से इस कार्य में तेजी की संभावना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा
