चंडीगढ़, 24 मार्च (हि.स.)। हरियाणा कैबिनेट ने हरियाणा सुपीरियर न्यायिक सेवा नियम, 2007 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने पंजाब न्यायालय अधिनियम, 1918 की धारा 30 में भी संशोधन को मंजूरी दी है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और ऐतिहासिक फैसलों के बाद उठाया गया है। संशोधन का मकसद न्यायिक भर्ती और सेवा शर्तों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और दक्षता बढ़ाना है। इस संशोधन से भर्ती प्रक्रिया में बड़े बदलाव आएंगे।

मंगलवार को यहां सीएम नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनट मीटिंग में प्रमोशन के लिए मेरिट-कम-सीनियरिटी कोटा को 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत किया गया। वहीं लिमिटेड प्रतियोगी परीक्षा (एलसीई) के तहत भर्ती का हिस्सा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया गया। बाकी 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के जरिए भरे जाएंगे। अब उम्मीदवारों में बार के वकील के साथ-साथ सबऑर्डिनेट न्यायिक सेवा के योग्य अधिकारी भी शामिल होंगे। इन बदलावों से न्यायिक अधिकारी बनने के मौके बढ़ेंगे और योग्य उम्मीदवारों के लिए भर्ती प्रक्रिया और अधिक समावेशी होगी।
कैबिनेट ने अनुभव, आयु और योग्यता से जुड़े नियमों को भी आसान और समान बनाया है। अलग-अलग भर्ती चैनलों से आने वाले उम्मीदवारों के लिए सेवा से जुड़े प्रावधान अब स्पष्ट हैं। वरिष्ठता और रोस्टर प्रबंधन के नियमों में बदलाव किया गया, ताकि निष्पक्षता बनी रहे। भर्ती अलग-अलग सालों में होने पर वरिष्ठता तय करने के साफ-सुथरे नियम लागू होंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा
