फर्रुखाबाद, 19 मार्च (हि.स.)। बरेली–इटावा हाईवे उस वक्त सनसनी से दहल उठा, जब सड़क किनारे एक नवजात शिशु का शव पड़ा मिला। राहगीरों की नजर जैसे ही मासूम पर पड़ी, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। दिल दहला देने वाली इस घटना ने इंसानियत को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। सूचना मिलते ही फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र की भोलेपुर चौकी से कांस्टेबल वीरेंद्र और राम मोहन सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, लेकिन सवाल वही पुराना—आखिर इस मासूम का कसूर क्या था? बेटियां कब तक यूं ही मार दी जाएंगी? यह कोई पहली घटना नहीं है।

फर्रुखाबाद में आए दिन नवजात बच्चियों के शव मिलने की खबरें सामने आती रहती हैं। कभी कूड़े में, कभी सड़क किनारे—हर बार एक नई मासूम जिंदगी को जन्म लेते ही मौत के घाट उतार दिया जाता है। सरकार के दावे बनाम हकीकत जहां एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बेटियों की सुरक्षा और सम्मान की बातें सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई हैं।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन घटनाओं पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही? हर बार पुलिस जांच का आश्वासन देती है, लेकिन न तो आरोपियों तक पहुंच हो पाती है और न ही ऐसी घटनाओं पर रोक लग पाती है।
जनता का गुस्सा फूटा
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे अपराधियों के हौसले और बुलंद होते जाएंगे। कोतवाल रणविजय सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / Chandrapal Singh Sengar
