शिमला, 28 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए हिमाचल प्रदेश में 45,809.93 करोड़ रुपये के कर्ज की संभावना जताई है। यह राशि पिछले साल की तुलना में 8.44 प्रतिशत ज्यादा है। नाबार्ड का कहना है कि इस कर्ज का इस्तेमाल मुख्य रूप से खेती, गांवों के विकास और छोटे कारोबारियों को आगे बढ़ाने के लिए किया जाएगा।

यह जानकारी बुधवार को शिमला में आयोजित नाबार्ड के स्टेट क्रेडिट सेमिनार में दी गई। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है और यहां की बड़ी आबादी गांवों में रहती है। ऐसे में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड ने अब तक गांवों, किसानों और ग्रामीण रोजगार से जुड़े कामों में अहम भूमिका निभाई है।

नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. विवेक पठानिया ने बताया कि आने वाले वित्त वर्ष में कुल करीब 45,810 करोड़ रुपये का कर्ज देने की योजना है। इसमें खेती, बागवानी, दूध उत्पादन, कृषि वानिकी और छोटे-मझोले उद्योगों को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि खास तौर पर एमएसएमई क्षेत्र पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि छोटे उद्योगों को नई तकनीक मिले और उन्हें अपने उत्पाद बेचने में मदद मिल सके।
डॉ. पठानिया ने बताया कि पिछले साल प्राथमिकता क्षेत्र के तहत 33,118 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया, जो तय लक्ष्य का 92 प्रतिशत रहा। खेती के लिए 12,700 करोड़ रुपये की कर्ज क्षमता तय की गई थी। इसमें से 4,800 करोड़ रुपये का फसल कर्ज दिया गया, जिसमें नाबार्ड ने आधे से ज्यादा हिस्से में मदद की। खेती से जुड़े लंबे समय के कर्ज के रूप में करीब 2,600 करोड़ रुपये भी दिए गए।
उन्होंने यह भी बताया कि गांवों में सड़कों, बाजारों और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पिछले साल 1,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर की गईं, जिनमें से 850 करोड़ रुपये जारी किए गए। इस साल अब तक 713 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत हुई हैं और 560 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा रोजगार और आजीविका से जुड़ी योजनाओं के लिए करीब 20 करोड़ रुपये की मदद दी गई है।
मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और सभी को विकास से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि नाबार्ड की मदद से स्वयं सहायता समूहों और किसान संगठनों को मजबूत किया गया है। राज्य में 1,147 प्राथमिक कृषि साख समितियों को डिजिटल बनाया गया है, जिससे गांवों में बैंकिंग सुविधाएं आसान हुई हैं।
उन्होंने कहा कि बदलते मौसम को देखते हुए जल संरक्षण, गांवों को जोड़ने वाली सड़कें और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी नाबार्ड का सहयोग जरूरी है। राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया कि नाबार्ड के सुझावों को आने वाली योजनाओं और बजट में शामिल किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
