धर्मशाला, 26 फ़रवरी (हि.स.)।

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि हिमाचल बोर्ड के स्कूलों को सीबीएसई में कन्वर्ट करने के फैसले पर पुनर्विचार करे। यूनियन का मानना है कि बच्चों पर सीबीएसई थोपने के बजाय, अच्छा होता सरकार आदर्श मुख्यमंत्री स्कूल खोलती। एचपी बोर्ड के स्कूलों को सीबीएसई में कन्वर्ट करने के विरोध अभिभावकों के साथ बच्चे भी नारे लगाने को मजबूर हो रहे हैं। सरकार इस मामले पर गंभीरता से पुनर्विचार करे, जिससे कि सीबीएसई के कारण अभिभावकों व बच्चों में जो असमंजस की स्थिति है, उससे उन्हें राहत मिल सके। यह बात हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष सुनील शर्मा ने वीरवार को प्रेसवार्ता में कही।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूल शिक्षा बोर्ड के स्कूलों को सीबीएसई में मर्ज करने का फैसला लिया है जोकि पूरी तरह से गलत है। इन स्कूलों को मर्ज करने की बजाय अगर प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री आदर्श स्कूल शुरू करती तो प्रदेश के बच्चों को काफी फायदा होता है। उन्होंने कहा कि ब्रांड बदलने से शिक्षा का स्तर नहीं बदल जाता, क्योंकि सीबीएसई के स्कूलों में भी एनसीईआरटी की ही किताबें पढ़ाई जाएंगी और वही किताबें हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड पढ़ा रहा है। इसके अलावा सीबीएसई के स्कूलों में भी वही शिक्षक होंगे, जो एचपी बोर्ड के स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं तथा विद्यार्थी भी वही होंगे जो स्कूल शिक्षा बोर्ड से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार को एक बार फिर से अपने फैसले पर मंथन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश सरकार अपने फैसले पर मंथन नहीं करती है तो स्कूल शिक्षा बोर्ड कर्मचारी यूनियन न्यायालय जाने से भी गुरेज नहीं करेगा। इससे पहले बोर्ड कर्मचारी यूनियन बुद्धिजीवी वर्ग से भी विचार विमर्श करेगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा के समय में स्कूलों को सीबीएसई करने के लिए कई स्कूलों को मर्ज किया जा रहा, जिससे परीक्षा की तैयारी कर रहे बच्चे असमंजस में पड़ गए हैं। एक ओर सरकार क्वालिटी एजुकेशन की बात कह रही है, वहीं इस तरह के निर्णयों से बच्चों का परीक्षा के समय मनोबल गिराने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह मामला छात्र हित से जुड़ा है और बोर्ड कर्मचारी यूनियन छात्र हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया
