शिमला, 12 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में अप्रैल माह में हुई बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधी-तूफान ने किसानों और बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राज्य के कई जिलों में तैयार और फूल अवस्था में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि इस बार मौसम की मार से उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया है और अब उन्हें सरकार से उचित मुआवजे की उम्मीद है।

शिमला, कुल्लू, मंडी, सोलन और किन्नौर जिलों में सेब, गेहूं, जौ, मटर और स्टोन फ्रूट्स की फसलों को करीब 40 से 60 प्रतिशत तक नुकसान होने की बात सामने आई है। शिमला और कुल्लू के ऊंचाई वाले इलाकों में सेब के पेड़ों पर फ्लावरिंग स्टेज के दौरान ओलावृष्टि होने से फूल झड़ गए, जिससे इस साल की पैदावार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। वहीं मंडी, बिलासपुर, कांगड़ा और हमीरपुर जिलों में कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल खेतों में ही गिर गई है।
किसानों और बागवानों का कहना है कि पिछले साल सूखे की मार झेलने के बाद इस बार ओलावृष्टि ने उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। उनका कहना है कि लगातार दूसरे साल प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने के कारण आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है, इसलिए सरकार को जल्द नुकसान का आकलन कर राहत प्रदान करनी चाहिए।
किसान नेता हरीश चौहान ने रविवार को कहा कि प्रदेश के किसान बार-बार मौसम की मार झेल रहे हैं, लेकिन मौसम आधारित फसल बीमा योजना का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीमा कंपनियां नुकसान के बाद भी भुगतान में देरी कर रही हैं, जिससे किसानों और बागवानों को और परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने सरकार से बीमा कंपनियों पर सख्ती करने की मांग की है।
वहीं राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने माना कि बेमौसमी बारिश, बर्फबारी और ओलावृष्टि से किसानों और बागवानों को नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को नुकसान का आकलन करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान मुआवजा राशि कम है और इसे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया जाएगा। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि बीमा कंपनियां समय पर भुगतान नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
