– धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन और पहाड़ की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया संबल

देहरादून, 06 मार्च (हि.स.)। बहुप्रतीक्षित उत्तराखंड की चारधाम यात्रा केवल आस्था का मार्ग ही नहीं, बल्कि पर्वतीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला बड़ा आधार भी मानी जाती है। इस वर्ष यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण छह मार्च से शुरू कर दिया गया है। साथ ही पर्यटन, धार्मिक पर्यटन और स्थानीय व्यापार से जुड़ी उम्मीदें भी तेज हो गई हैं।
चारधाम यात्रा हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को हिमालय की गोद में बसे पवित्र धामों तक खींच लाती है। यात्रा के दौरान होटल, गेस्ट हाउस, ट्रांसपोर्ट, घोड़ा-खच्चर सेवा, स्थानीय भोजनालय, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है। ऐसे में इस यात्रा को उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा भी माना जाता है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि बेहतर प्रबंधन, डिजिटल व्यवस्था और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के साथ चारधाम यात्रा 2026 न केवल आस्था के मार्ग को सुगम बनाएगी, बल्कि उत्तराखंड की पर्यटन अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा देगी। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस वर्ष यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से होगी, जब यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वहीं हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने की तिथि बाद में घोषित की जाएगी।
प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठाएगी दुनिया
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि स्पिरिचुअल टूरिज्म का सबसे बड़ा उदाहरण है। इस यात्रा के कारण देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु हिमालयी संस्कृति, स्थानीय परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य से भी परिचित होते हैं। इससे उत्तराखंड में पर्यटन का दायरा केवल तीर्थ तक सीमित न रहकर एडवेंचर, इको और सांस्कृतिक पर्यटन तक फैल जाता है।
तीर्थयात्रा से अर्थव्यवस्था को मिलेगी संजीवनी
स्थानीय व्यापारियों और होटल व्यवसायियों को भी इस वर्ष अच्छी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। यात्रा मार्गों पर छोटे दुकानदार, ढाबा संचालक, टैक्सी चालक और पोर्टर वर्ग की आजीविका काफी हद तक इसी यात्रा पर निर्भर रहती है। कई गांवों में तो चारधाम यात्रा के महीनों को ही साल की मुख्य कमाई का समय माना जाता है।
भारतीय श्रद्धालु आधार कार्ड तो विदेशी श्रद्धालु ई-मेल आईडी से कर सकेंगे पंजीकरण
यात्रा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने इस बार डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था को भी मजबूत किया है। श्रद्धालु वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in और Tourist Care Uttarakhand पर मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। भारतीय श्रद्धालु आधार कार्ड से और विदेशी श्रद्धालु ई-मेल आईडी के माध्यम से पंजीकरण कर सकेंगे। जो श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण नहीं करा पाते, उनके लिए 17 अप्रैल से ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून में भौतिक पंजीकरण केंद्र भी शुरू किए जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश
