
किशोरों में बढ़ रही इंटरनेट की लत, मानसिक स्वास्थ्य

पर असर, ग्रामीण लड़कों और शहरी लड़कियों में इंटरनेट लत
अधिक
इंटरनेट एडिक्शन बना नई पीढ़ी के लिए चिंता का
विषय, किशोरों की बढ़ती इंटरनेट निर्भरता पर गुजविप्रौवि
में शोध
डिजिटल युग में बढ़ती लत, इंटरनेट बना किशोरों
के लिए चुनौती, छिपे मनोवैज्ञानिक
कारणों का खुलासा
हिसार, 10 मार्च (राजेश्वर बैनीवाल)। यहां के गुरु जम्भेश्वर
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में किए गए एक शोध में किशोरों में बढ़ती इंटरनेट
लत के पीछे के मनोसामाजिक कारणों का खुलासा हुआ है। यह शोध मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष
डॉ. संजय परमार के निर्देशन में डॉ. अमित सारसर ने पीएचडी के तहत किया।
शोध में पाया गया कि इंटरनेट लत का सीधा संबंध
टालमटोल और आवेगशीलता से है। जिन किशोरों में कार्यों को टालने और आवेग में निर्णय
लेने की प्रवृत्ति अधिक पाई गई, उनमें इंटरनेट लत का स्तर भी अधिक देखा गया। इसके अतिरिक्त, जिन किशोरों में आत्मसम्मान और
लचीलापन का स्तर कम था, उनमें इंटरनेट के अत्यधिक उपयोग की प्रवृत्ति अधिक पाई गई।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि भावनात्मक अस्थिरता जैसे व्यक्तित्व गुण इंटरनेट लत
से जुड़े हुए हैं।
ग्रामीण लड़कों और शहरी लड़कियों में अधिक प्रभाव
शोध के निष्कर्षों के अनुसार, ग्रामीण किशोर
लड़कों में इंटरनेट लत का स्तर अपेक्षाकृत अधिक पाया गया, जिसका एक संभावित कारण ऑनलाइन
गेमिंग की अधिक प्रवृत्ति और सीमित मनोरंजन साधन हो सकते हैं। वहीं, शहरी किशोरियों
में सोशल मीडिया और डिजिटल संचार के अधिक उपयोग के कारण इंटरनेट निर्भरता का स्तर अपेक्षाकृत
अधिक पाया गया।
हालांकि लिंग और क्षेत्र के आधार पर स्वतंत्र
रूप से कोई बड़ा अंतर नहीं मिला, लेकिन दोनों के संयुक्त प्रभाव (इंटरैक्शन) से महत्वपूर्ण
अंतर सामने आया, जो दर्शाता है कि इंटरनेट लत एक बहुआयामी मनोवैज्ञानिक समस्या है।
समाधान की दिशा में सुझाव
शोध में सुझाव दिया गया है कि विद्यालयों में
नियमित काउंसलिंग कार्यक्रम, भावनात्मक संतुलन एवं आत्म-नियंत्रण प्रशिक्षण तथा डिजिटल
साक्षरता अभियान चलाए जाने चाहिए। साथ ही अभिभावकों की सक्रिय निगरानी और मार्गदर्शन
भी किशोरों को इंटरनेट लत से बचाने में सहायक हो सकता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई
ने मंगलवार काे इस शोध के लिए शोध निर्देशक व शोधकर्ता को बधाई दी तथा कहा कि गुणवत्तापरक व समाज
उपयोगी शोध ही वास्तविक शोध है। मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. संजय परमार ने बताया
कि इस अध्ययन में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कुल 400 किशोरों (लड़के एवं लड़कियां)
को शामिल किया गया। शोध का उद्देश्य इंटरनेट लत और उससे जुड़े मनो-सामाजिक कारकों का
गहन अध्ययन करना था। डॉ. अमित सारसर के अनुसार ‘इंटरनेट आधुनिक जीवन
का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसका संतुलित और नियंत्रित उपयोग ही किशोरों के मानसिक
स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।’ इंटरनेट की लत एक मनोसामाजिक समस्या है। यह मनोवैज्ञनिक
तथा सामाजिक कारणों का मिश्रण बनकर एक किशोर को गलत रास्ते पर ले जाता है। परिवार,
समाज तथा दूसरी सभी संस्थाओं को इस दिशा में काम करने की आवश्यकता है। एक मानसिक रूप
से स्वस्थ किशोर ही एक सक्षम समाज तथा राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर
