औरैया, 04 मार्च (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में अजीतमल तहसील बुधवार को गांव अमावता की प्रसिद्ध फाग टोली ने एक बार फिर अपनी पारंपरिक प्रस्तुति से क्षेत्रवासियों का दिल जीत लिया। सदियों पुरानी फाग गायन परंपरा को संजोए यह टोली हर वर्ष होली के अवसर पर गांव की गलियों और चौपालों में पहुंचकर लोक संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरती है।

ब्रज और बुंदेलखंड अंचल से जुड़ी फाग गायकी की परंपरा ग्रामीण जीवन में विशेष महत्व रखती है। होली के अवसर पर गाए जाने वाले फाग गीत न केवल उत्सव का उल्लास बढ़ाते हैं, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी सौहार्द को भी मजबूत करते हैं। अमावता की फाग टोली ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ढोलक, हारमोनियम और झांझ की मधुर थाप पर पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए। टोली के कलाकारों ने देहाती अंदाज़ में ऐसे फाग गाए कि बच्चे, युवा और बुज़ुर्ग सभी झूम उठे। गांव की चौपालें रंग, अबीर और गुलाल से सराबोर नजर आईं। विशेष बात यह रही कि गीतों के माध्यम से आपसी भाईचारे, प्रेम और सामाजिक समरसता का संदेश भी दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि अमावता की फाग टोली अब केवल गांव तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास के गांवों में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी है। लोग हर वर्ष बेसब्री से इनकी प्रस्तुति का इंतजार करते हैं। “हमारी संस्कृति हमारी पहचान है” के संदेश के साथ आयोजित होली मिलन समारोह में रामकुमार गुप्ता, रामलखन सिंह, पुतुआ सिंह, मेवा लाल बाथम, ध्यान पाल सिंह, रतीभान सिंह, अन्नू बाथम, उमाशंकर, सुरेश सिंह सेंगर, सुरेंद्र सेंगर, विश्वनाथ, बॉबी सेंगर, गुरुदेव, बहोरन, अजय पाल, अमित, जंटर गुरु जी, रिंकू फौजी, सुमित, गोविंद, बदले गुप्ता, अतुल, अनुज और पप्पू पंडित सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे। इस प्रकार अमावता की फाग टोली ने पुरानी लोक परंपरा को जीवंत रखते हुए होली पर्व को यादगार बना दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार
