
मुंबई,28फरवरी ( हि.स.) । हालांकि रंगपंचमी रंगों, खुशी और दोस्ती का त्योहार है, लेकिन इसे मनाते समय सेहत और पर्यावरण का ध्यान रखना ज़रूरी है। रंगपंचमी के मौके पर, ठाणे शहर के बाज़ारों में कई तरह के रंग बिक्री के लिए उपलब्ध हो गए हैं। हालांकि, पर्यावरण एक्सपर्ट और मेडिकल एक्सपर्ट लोगों से सावधान रहने की अपील कर रहे हैं क्योंकि इन रंगों में बहुत ज़्यादा केमिकल चीज़ें हो सकती हैं। ठाणे जिला सिविल अस्पताल के सर्जन डॉ पवार का कहना है कि होली पर उपयोग किए गए केमिकल कलर आंखों व त्वचा को अत्यंत घातक हो सकते हैं।

केमिकल रंगों में लेड, क्रोमियम, कॉपर सल्फेट, एल्युमिनियम ब्रोमाइड जैसे खतरनाक तत्व हो सकते हैं। इन रंगों को स्किन पर लगाने से खुजली, रैश, सूजन, एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर रंग आंखों में चला जाए, तो जलन, इंफेक्शन या नज़र कमज़ोर होने का खतरा रहता है। साथ ही, अगर रंग की धूल सांस के ज़रिए शरीर में चली जाए, तो अस्थमा या सांस की समस्याएं बढ़ सकती हैं।
खासकर छोटे बच्चों, सीनियर सिटिज़न्स और स्किन की बीमारियों वाले लोगों को ज़्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है। सड़क पर या पब्लिक जगहों पर अनजान लोगों को ज़बरदस्ती रंग न लगाएं। रंग खेलते समय आंख, नाक और मुंह को बचाना ज़रूरी है।
एनवायरनमेंटलिस्ट ने नेचुरल और ऑर्गेनिक रंगों के इस्तेमाल की सलाह दी है। हल्दी, चुकंदर, पालक और फूलों की पंखुड़ियों जैसी नेचुरल चीज़ों से बने रंग सेफ़ और इको-फ्रेंडली होते हैं। ऐसे रंगों के इस्तेमाल से स्किन पर साइड इफ़ेक्ट का चांस कम होता है और पानी का पॉल्यूशन भी रुकता है।
रंगपंचमी के दौरान पानी बर्बाद न करने और प्लास्टिक बैग या गुब्बारों का इस्तेमाल न करने की भी अपील की गई है। हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है कि वह त्योहार मनाते समय दूसरों की सुरक्षा और एनवायरनमेंट का ध्यान रखे।
ठाणेकरों से उम्मीद है कि वे रंगपंचमी को खुशी-खुशी और सुरक्षा के दायरे में मनाकर एक हेल्दी और इको-फ्रेंडली त्योहार का आइडियल बनाएं।
“रंगपंचमी मनाते समय केमिकल रंगों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। ऐसे रंगों से स्किन, आंख और रेस्पिरेटरी सिस्टम पर साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं। नेचुरल रंगों का इस्तेमाल करें और अगर आपको कोई एलर्जी या परेशानी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें,”_डॉ कैलाश पवार जिला सिविल सर्जन
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा
