
जयपुर, 09 फ़रवरी (हि.स.)। रंगों के पर्व होली को लेकर जयपुर के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। जैसे-जैसे होली नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे शहर में गुलाल की मांग में तेजी दर्ज की जा रही है। लोग इस बार भी रासायनिक रंगों की बजाय पारंपरिक गुलाल से होली खेलना अधिक पसंद कर रहे हैं, जिससे रंग-गुलाल के कारोबार को लेकर व्यापारियों में उत्साह नजर आ रहा है।

शहर के थोक और खुदरा बाजारों में लाल, हरा, गुलाबी, पीला और जामुनी रंग का गुलाल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। गुलाल की बढ़ती खपत को देखते हुए जयपुर के निर्माताओं और व्यापारियों को इस बार भी करोड़ों रुपये के कारोबार की उम्मीद है। होली से करीब एक माह पहले ही गुलाल की बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जबकि पर्व के नजदीक आते-आते मांग और तेज होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
गुलाल निर्माण से जुड़े फैक्ट्री कर्मचारी अरविंद सैनी ने बताया कि गुलाल मुख्य रूप से अरारोट के चूर्ण से तैयार किया जाता है। सफेद अरारोट पाउडर में पहले रंग मिलाया जाता है और फिर उसे मशीनों में अच्छी तरह पीसा जाता है। इससे रंग पाउडर में समान रूप से मिल जाता है और गुलाल की गुणवत्ता व कोमलता बढ़ जाती है। इसके बाद उसमें खुशबू मिलाई जाती है, जिससे गुलाल सुगंधित और आकर्षक बनता है। उन्होंने बताया कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान पाउडर कुछ समय के लिए गीला हो जाता है, जिसे सुखाने के बाद दोबारा मशीन में पीसा जाता है। इस प्रक्रिया से गुलाल और भी मुलायम हो जाता है। अरारोट से बना यह ‘स्ट्रॉस गुलाल’ त्वचा के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है, इसी कारण उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनता जा रहा है।
अरविंद सैनी ने बताया कि पहले गुलाल पूरी तरह हाथों से तैयार किया जाता था। आज भी जयपुर में कुछ पारंपरिक दुकानें और कारीगर हैं, जहां पुराने तरीके से हाथ से गुलाल बनाया जाता है। हालांकि, समय के साथ उत्पादन बढ़ाने और मांग को पूरा करने के लिए अब अधिकांश स्थानों पर मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे बड़ी मात्रा में गुलाल तैयार किया जा रहा है।
व्यापारियों के अनुसार बीते कुछ वर्षों में लोगों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ी है। इसी वजह से केमिकल युक्त रंगों की जगह अरारोट से बने गुलाल की मांग बढ़ी है। बाजार में उपलब्ध गुलाल की कीमत भी गुणवत्ता और खुशबू के अनुसार तय की जा रही है, जिससे हर वर्ग के उपभोक्ता अपनी पसंद के अनुसार खरीदारी कर पा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश
