नई दिल्ली, 16 जनवरी (हि.स.)। आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पोंडुरु गांव में बनाई जाने वाली खादी को शुक्रवार को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग मिल गया है। इस पर खुशी व्यक्त करते हुए खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया है।
जीआई टैग टैग मिलने का मतलब है कि अब पोंडुरु खादी की पहचान कानूनी रूप से सुरक्षित हो गई है और कोई भी इसकी नकल नहीं कर सकेगा।
आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि,
पोंडुरु खादी महात्मा गांधी की स्वदेशी सोच से जुड़ी हुई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में खादी आज आत्मनिर्भर भारत की पहचान बन चुकी है। उन्होंने कहा
जल्द ही पोंडुरु खादी से जुड़े कातने-बुनने वाले कारीगरों को सम्मानित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह जीआई टैग पारंपरिक कारीगरों के सम्मान, संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पोंडुरु खादी क्यों खास है?
यह खादी आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पोंडुरु गांव में बनाई जाती है। इसे स्थानीय लोग पट्नुलु कहते हैं । यह पूरी तरह हाथ से काती और बुनी जाती है। इसमें पहाड़ी कपास, पुनासा कपास और लाल कपास का इस्तेमाल होता है। कपास साफ करने के लिए वलुगा मछली की जबड़े की हड्डी का उपयोग किया जाता है- यह तरीका दुनिया में कहीं और नहीं है । इसकी सूत की बारीकी (यार्न काउंट) 100–120 होती है, जो बहुत ही उच्च गुणवत्ता दर्शाती है। जीआई टैग से पोंडुरु खादी को देश और विदेश में पहचान मिलेगी। कारीगरों की आमदनी बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ग्राहकों को असली और शुद्ध खादी मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी
