– ई-वाहन नीति, मेट्रो विस्तार और औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ से बदलेगी दिल्ली-एनसीआर की हवा
नई दिल्ली, 16 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण को प्रभावी रूप से नियंत्रित करने के लिए 12 माह और सातों दिन काम कर रही है, इसके लिए अल्प एवं दीर्घकालीन विस्तृत योजनाएं बनाकर उन्हें प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लंबी है, इसलिए सभी निकाय भी पूरी रणनीति बनाकर कार्य कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में वायु प्रदूषण के नियंत्रण को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, मनजिंदर सिंह सिरसा, डॉ. पंकज कुमार सिंह, मुख्य सचिव राजीव वर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी विभाग प्रमुखों से प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए बनाए गए ब्लू प्रिंट के हिसाब से प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि इन्हें समय पर क्रियान्वित किया जाए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार चार वर्षों की अवधि में वायु प्रदूषण (पीएम 2.5) के स्तर में पर्याप्त कमी लाने के लिए एक स्पष्ट, मापने योग्य और परिणाम-उन्मुख कार्य योजना पर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार की योजना अपने कुल बस बेड़े को 31 दिसंबर 2026 तक 6,000 बसों, 31 दिसंबर 2027 तक 7,500 बसों, 31 मार्च 2028 तक 10,400 बसों और 31 मार्च 2029 तक 14,000 बसों तक बढ़ाने की है। इन 14,000 बसों की निर्धारित योजना में 7 मीटर लंबाई की 500 बसें शामिल हैं, जो ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ (अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी) को मजबूत करने के लिए तैनात की जाएंगी। वर्तमान में 100 इलेक्ट्रिक मेट्रो फीडर बसों की तैनाती के माध्यम से लास्ट-माइल कनेक्टिविटी प्रदान की जा रही है। 31 जनवरी 2026 तक 10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर ई-ऑटो, बाइक टैक्सी और फीडर कैब के पायलट एकीकरण को निष्पादित करने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत दिल्ली के 58 लाख दोपहिया वाहनों को मुख्य रूप से लक्षित किया जा रहा है, जिसमें सब्सिडी और स्क्रैपिंग प्रोत्साहन शामिल हैं। कमर्शियल ट्रकों और तिपहिया वाहनों के लिए ब्याज सबवेंशन और केंद्र की ‘पीएम ई-ड्राइव’ योजना का लाभ उठाया जा रहा है, ताकि स्वच्छ ईंधन की ओर बढ़ सकें। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक जाम से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए 62 ‘कंजेशन पॉइंट्स’ की पहचान की गई है, जिनमें से 30 पर तत्काल सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है। ट्रैफिक प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए दिल्ली सरकार ने डीटीसी से 1,200 अतिरिक्त कर्मी ट्रैफिक पुलिस को उपलब्ध कराए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधारित परिवहन प्रणाली को प्रदूषण कम करने का मुख्य आधार माना गया है। वर्तमान में दिल्ली मेट्रो का 395 किमी का नेटवर्क प्रतिदिन 65-70 लाख यात्रियों को सेवा दे रहा है, जिसे फेज-4 के 110 किमी और फेज-5ए व 5बी के 96 किमी के साथ और विस्तार दिया जा रहा है। फेज-4 के पूरा होने से यात्रियों की संख्या दोगुनी होने की उम्मीद है। साथ ही, अगले चार वर्षों में एनसीआरटीसी का कुल नेटवर्क 323 किमी तक पहुंचाया जाएगा।
दिल्ली सरकार ने व्यापक सड़क सुधार कार्यों के लिए 6,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई है। दिल्ली में कुल लगभग 3,300 किमी सड़क की लंबाई को फिर से बनाने या सुधारने की आवश्यकता है, इस 3,300 किमी में पीडब्ल्यूडी की 800 किमी सड़कें, नगर निगम की 1,200 किमी सड़कें और अनधिकृत कॉलोनियों की 1,000 किमी सड़कें शामिल हैं। योजना के तहत सड़कों के किनारों और सेंट्रल वर्ज (बीच का हिस्सा) का पूर्ण पक्कीकरण और हरियाली शामिल होगी। एक वर्ष के भीतर काम पूरा करने के लक्ष्य के साथ दो महीने के भीतर निविदाएं जारी की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क की धूलसे निपटने के लिए बड़े पैमाने पर मशीनीकृत सड़क सफाई और धूल दबाने के उपाय लागू किए जा रहे हैं। वर्तमान में एमसीडी, एनडीएमसी, डीएसआईआईडीसी और एनएचएआई सहित सड़क-स्वामित्व वाली एजेंसियों द्वारा 76 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें (एमआरएसएम) तैनात की गई हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत 14 अतिरिक्त मशीनें 31 जनवरी, 2026 तक एमसीडी द्वारा तैनात की जाएंगी। उन्होंने कहा कि पुराने कचरे को खत्म करने के लिए सख्त समय सीमा तय की गई है, जैसे ओखला लैंडफिल: जुलाई 2026 तक, भलस्वा लैंडफिल: अक्टूबर 2026 तक और गाजीपुर लैंडफिल दिसंबर 2027 तक। दिल्ली सरकार ने कचरा प्रबंधन के लिए एमसीडी को चालू वित्त वर्ष में 500 करोड़ रुपये और भविष्य में 300 करोड़ रुपये सालाना देने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाते हुए अब तक 1,000 से अधिक प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को सील किया गया है। हरियाली बढ़ाने के लिए अगले 4 साल में ‘दिल्ली रिज’ क्षेत्र में 35 लाख पेड़ लगाए जाएंगे। निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए तेहखंड में नया प्रोसेसिंग प्लांट शुरू किया जा रहा है। साथ ही सर्दियों में कचरा जलाने से रोकने के लिए 15,500 इलेक्ट्रिक हीटर बांटे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बढ़ते वाहनों और ट्रैफिक दबाव को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार ने स्मार्ट पार्किंग प्रबंधन को प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है। सरकार का मानना है कि मौजूदा पार्किंग सुविधाएं अपर्याप्त हैं और जीरो पार्किंग जोन और निर्धारित सड़क किनारे पार्किंग नियमों के प्रभावी प्रवर्तन की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर पार्किंग अवसंरचना के विस्तार की योजना बनाई गई है, जिसमें स्मार्ट प्राइसिंग व्यवस्था लागू की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कड़े प्रवर्तन उपाय लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत विशेष प्रवर्तन और पंजीकरण अभियान शुरू किए जा रहे हैं। साथ ही दिल्ली की सीमाओं पर प्रवेश बिंदुओं पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव
