—विपक्षी दलों के नेताओं के बयान पर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ने उठाया सवाल
वाराणसी, 16 जनवरी (हि.स.)। धार्मिक नगरी काशी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर विरोधी दलों के नेताओं की सियासी बयानबाजी पर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने बयान देकर स्थिति स्पष्ट किया है। शुक्रवार शाम नगर विकास मंत्री ने सोशल मीडिया के अपने अधिकृत अकाउंट ‘एक्स’ पर लिखा कि काशी में माँ गंगा के तट पर स्थित मणिकर्णिका घाट अत्यंत प्राचीन, पौराणिक एवं निरंतर दाह-संस्कार की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थल है। दशकों से यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में शवदाह होता रहा है, जिसमें आने वाले लोगों को बैठने, ठहरने, लकड़ी भंडारण, पूजा सामग्री, मुंडन स्थल एवं अवशेषों की सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में भारी असुविधा का सामना करना पड़ता रहा है। उन्होंने लिखा कि इन समस्याओं से सभी परिचित थे, लेकिन पूर्व की सरकारों द्वारा दशकों तक कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, नमो घाट, अस्सी घाट सहित अनेक विकास कार्यों के माध्यम से काशी की भव्यता और दिव्यता को नई दिशा मिली है। इसी क्रम में अब मणिकर्णिका घाट पर भी सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सुविधाजनक पुनर्निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान परियोजना के अंतर्गत पौराणिक मंदिरों, चिन्हों और धरोहरों का पूर्ण संरक्षण करते हुए शवदाह स्थल, प्लेटफार्म, लकड़ी स्टोर, पूजा सामग्री स्टोर, मुंडन स्थल तथा मढ़ी का पुनर्निर्माण किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो एवं फोटो कार्य के दौरान अस्थायी रूप से प्रभावित कलाकृतियों के हैं, जिन्हें सुरक्षित रख लिया गया है और पुनर्निर्माण के पश्चात यथास्थान पुनः स्थापित किया जाएगा। इस प्रक्रिया में किसी भी मंदिर को कोई क्षति नहीं पहुंची है।
नगर विकास मंत्री ने यह भी कहा कि पुण्यश्लोक रानी अहिल्याबाई होलकर जी की कृतियों सहित घाट की समस्त पुरातन धरोहरों का संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनकी 300वीं जयंती पूरे सम्मान एवं श्रद्धा के साथ मनाई गई है और उनके योगदान के प्रति सरकार पूर्णतः कृतज्ञ है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कुछ नेता राजनीतिक स्वार्थवश निष्ठापूर्ण पुनर्निर्माण कार्य को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पूर्व के लंबे शासनकाल में इस घाट की समस्याओं के समाधान हेतु कोई प्रयास किया गया था, और क्या कोरोना काल में यहां उत्पन्न परिस्थितियों के लिए उन्होंने कोई ठोस कदम उठाए थे। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार “विरासत के साथ विकास” की भावना के अनुरूप काशी की दिव्यता, भव्यता एवं मानवीय सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और मणिकर्णिका घाट का पुनर्निर्माण इसी सोच का सशक्त उदाहरण है।
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से मणिकर्णिका घाट के पुनर्निर्माण को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक एवं तथ्यहीन प्रचार का तथ्यों के साथ आइना दिखाया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी
