
– भारत भवन परिसर में बिखरे बहुरंगी संस्कृति के रंग, 24 जनवरी तक प्रतिदिन होंगे सांस्कृतिक, वैचारिक आयोजन
भोपाल, 16 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा वैश्विक सभ्यताओं के संघर्ष और औदार्य की महागाथा महाभारत पर केन्द्रित देश के पहले और अब तक का सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन नौ दिवसीय महाभारत समागम का शुक्रवार देर शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुभारंभ किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विरासत से विकास की ओर देश को मंजिल दर मंजिल आगे ले जाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। उन्होंने विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई है। वे भारतीय संस्कृति को विभिन्न देशों तक पहुंचाने का प्रयत्न करते हैं। अन्य देशों के राष्ट्रपति जब भारत आते हैं तो उनको पवित्र श्रीमद्भागवत गीता हमारे प्रधानमंत्री भेंट करते हैं।
प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के भारत भवन में आयोजित महाभारत समागम का पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की पत्रिका और वेबसाइट का लोकार्पण किया। साथ ही भूली बिसरी सभ्यताएं का विमोचन किया। वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव राम तिवारी ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए।
यह आयोजन 9 दिन चलेगा। समागम के शुभारंभ अवसर पर परिसर के खुले विशाल मंच पर मेत्रैयी पहाड़ी और उनके कलाकार साथियों ने विश्व को शांति और न्याय का संदेश देने वाली सशक्त सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। उन्होंने अपनी प्रस्तुति से भारत भवन परिसर में बहुरंगी संस्कृति के रंग बिखेर दिए। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने भारत भवन परिसर की कला दीर्घाओं में आयोजित दो विशेष प्रदर्शनियों का भी अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक सभ्यताओं के संघर्ष और औदार्य की महागाथा महाभारत पर केन्द्रित देश का प्रथम और अब तक के सबसे वृहद आयोजन के साक्षी होने का यह अवसर है। इस महाभारत समागम में आकर ऐसा प्रतीत हो रहा है, जैसे महाभारत काल में पहुंचकर घटनाओं को देख रहे हों। कलाकारों ने अपने पात्रों को जीते हुए पूर्व जन्म से कथा का तानाबाना बुना है। मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस जैसे विशेष अवसर पर भी ऐसी प्रस्तुति की जाएगी। महाभारत समागन में इंडोनेशिया सहित अन्य राष्ट्रों के नाट्य समूह आमंत्रित किए गए हैं। वीर भारत न्यास का यह महत्वपूर्ण वैचारिक और सांस्कृतिक उपक्रम है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी नई ऊर्जा देगा।
रामायण और महाभारत काल से देश को समझना आसान, उदारता हमारी विशेषता
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रामायण और महाभारत काल की घटनाओं को देखने पर भारत को अच्छी तरह समझा जा सकता है। भारत की सभ्यता को नष्ट करने के कई सदियों के कृत्य देखें तो कष्ट के वे क्षण पीड़ादायक लगते हैं। लेकिन इसके साथ ही भारत की उदारता की छवि सबसे अलग है। हमारी सभ्यता में जो लचीलापन और औदार्य रहा है, यह एक ऐसी विशिष्टता है जिसके बलबूते हमारी सभ्यता ने विशेष मुकाम बनाया है। काल प्रवाह में अनेक सभ्यताएं आईं और चली गईं। भारत कठिन परिस्थितियों से निकलकर पुन: उठकर खड़ा हो सकता है।
नगरों में गीता भवन, गीता के ज्ञान, कर्म और भक्ति मार्ग को समझ रहे हैं युवा
मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता जयंती पर राज्य स्तर पर गीता पाठ प्रतियोगिताएं हुईं। इसके साथ ही वीर भारत न्यास द्वारा श्रीमद्भगवत गीता ज्ञान प्रतियोगिता भी हुई। यह बहुत संतोष का विषय है कि इसमें युवाओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। लाखों विद्यार्थियों ने गीता जयंती के माध्यम से गीता को अमर कर दिया। युवा गीता के ज्ञान, कर्म और भक्ति के मार्ग को समझ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतियोगिता के 88 विजेताओं में से कुछ विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। उल्लेखनीय है कि कुल 90 लाख के पुरस्कार दिए गए हैं, जिनमें नगद राशि के अलावा, लैपटॉप, ई रिक्शा और ई बाइक शामिल हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एक लाख रुपये का पुरस्कार जीतने वाली हिमांशी मिश्रा ने भी भेंट की और साथ में चित्र खिंचवाया। मुख्यमंत्री के इस प्रश्न पर कि गीता पाठ किससे सीखा- पर हिमांशी ने बताया कि उन्हें अपने माता-पिता से यह सब सीखने को मिला है। प्रतियोगिता में रायसेन की दीक्षा सिंह ने भी यह पुरस्कार जीता है। इसके अलावा ग्वालियर की मान्या भटनागर और छिंदवाड़ा के गोविंद सिंह को नगद पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर विधायक विष्णु खत्री, संस्कृति संचालक एनपी नामदेव, टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरू विजय मोहन तिवारी, मुकेश मिश्रा और अन्य अतिथि उपस्थित थे।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर
