जयपुर, 16 जनवरी (हि.स.)। हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों की लापरवाही के चलते चौमूं आवासीय योजना चार दशक बाद भी साकार नहीं हो सकी है। इससे चौमूं क्षेत्र के लोगों का राजस्थान आवासन मंडल के आवास पाने का सपना अधूरा ही बना हुआ है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान आवासन मंडल ने वर्ष 1989 में चौमूं में आवासीय योजना लांच की थी। योजना के तहत किसानों को अधिग्रहित भूमि के बदले 15 प्रतिशत विकसित भूमि देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई, वे आज तक विकसित भूमि का इंतजार कर रहे हैं।चौमूं कस्बे में आवासन मंडल ने वर्ष 1982 में आवासीय योजना के लिए भूमि चिह्नित की थी। अवाप्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद विशेषाधिकारी ने वर्ष 1989 में भूमि का कब्जा बोर्ड को सौंप दिया था। इसके बाद कुछ खातेदारों ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की, जिसे 19 मार्च 1997 को खारिज कर दिया गया। इसके बावजूद मंडल इस भूमि पर आवासीय योजना विकसित नहीं कर सका। लंबे समय तक जमीन खाली रहने के कारण कुछ लोगों ने उस पर पुनः कब्जा कर खेती सहित अन्य गतिविधियां शुरू कर दीं। बाद में आवासन मंडल ने पुलिस-प्रशासन की सहायता से अतिक्रमण हटवाया, लेकिन इसके बाद भी योजना पर काम आगे नहीं बढ़ सका।
किसानों ने अशुद्ध भूमि के नकद मुआवजे के स्थान पर 25 प्रतिशत विकसित भूखंड देने की मांग को लेकर आवेदन किया। इस संबंध में किसानों की सचिव जम्माराम चौधरी से वार्ता भी हुई। इसके बाद 16 मई 2011 को तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष ललित कोठारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में खातेदारों को 25 प्रतिशत विकसित भूमि देने का निर्णय लिया गया और इसकी स्वीकृति के लिए फाइल राज्य सरकार को भेजी गई। उल्लेखनीय है कि पूर्व में केवल 15 प्रतिशत विकसित भूमि देने का ही प्रावधान था।
योजना के तहत विभिन्न श्रेणियों के कुल 153 आवास प्रस्तावित थे। इनमें ईडब्ल्यूएस के 53, एलआईजी के 43, एमआईजी-ए के 29 और एमआईजी-बी के 25 प्लॉट शामिल थे। बड़ी संख्या में लोगों ने इन आवासों के लिए आवेदन किया था, लेकिन योजना पर काम शुरू नहीं होने के कारण आवेदकों को पंजीकरण राशि वापस करनी पड़ी।
राजस्थान आवासन मंडल के सचिव गोपाल सिंह शेखावत ने बताया कि चौमूं आवासीय योजना के लांच के समय भूमि के बदले 15 प्रतिशत विकसित भूमि देने का प्रावधान था, लेकिन अब किसान वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार 25 प्रतिशत विकसित भूमि की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में राज्य सरकार को स्वीकृति के लिए फाइल भेजी गई है। सरकार से अनुमति मिलने के बाद ही योजना पर काम शुरू हो सकेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश
