खाद्य मंत्री बोले, वीबी-जी रामजी योजना में 125 दिन के रोजगार की गारंटी, मनरेगा में मिलता था सिर्फ 100 दिन का काम
भोपाल, 16 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि कांग्रेस भगवान श्रीराम के नाम से नफरत करती है और केवल वोट की राजनीति के लिए महात्मा गांधी का नाम योजनाओं से जोड़ती रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच का परिणाम वीबी-जी रामजी योजना है, जो वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में गांवों को समृद्ध बनाएगी।
नरसिंहपुर प्रवास के दौरान शुक्रवार काे मीडिया से चर्चा करते हुए मंत्री राजपूत ने कहा कि वीबी-जी रामजी योजना में ग्रामीण परिवारों को 125 दिन के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी गई है, जबकि मनरेगा में केवल 100 दिन का काम मिलता था। नई योजना में भुगतान 7 दिनों के भीतर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मनरेगा पर अब तक 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें से 8.53 लाख करोड़ रुपये मोदी सरकार के कार्यकाल में व्यय किए गए। कांग्रेस शासन में जहां 35 हजार करोड़ का बजट था, उसे बढ़ाकर पहले 74 हजार करोड़ और अब 95 हजार करोड़ कर दिया गया है, जो लगभग तीन गुना वृद्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री माेदी, महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को जमीन पर उतार रहे हैं।
राज्य 60 दिन कर सकते हैं अधिसूचित
खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि पुरानी योजना में वर्ष में कभी भी मजदूरी प्राप्त किया जा सकता है, जबकि नई योजना में कृषि के व्यस्ततम समय जैसे बुवाई, कटाई के दौरान पर्याप्त कृषि श्रमिकों की उपलब्धता को भी सुनिश्चित किया गया है। नई योजना में राज्यों को 60 दिन अधिसूचित करने का प्रावधान है, जिसके अंतर्गत फसलों की बुवाई, कटाई के समय को सम्मिलित कर खेती के लिए मजदूरों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इस तरह 125 दिन के साथ मजदूरों को 60 दिन खेती किसानी में भी कार्य करने के लिए मिलेंगे।
कांग्रेस ने बार बार योजनाओं का नाम बदला
प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु बनाई गई योजना का 1980 में इंदिरा गांधी ने नाम बदला फिर राजीव गांधी ने इसे जवाहर रोजगार योजना नाम दिया। 2004 मे नरेगा था बाद में कांग्रेस ने योजना के जरिये वोट की राजनीति करने हेतु महात्मा गांधी का नाम जोड़ मनरेगा किया। कांग्रेस ने देश के लगभग 600 संस्थानों, योजनाओं व पुरस्कारों के नाम गांधी परिवार के नाम पर रखे थे। उन्होंने खेल रत्न को राजीव गांधी के नाम, नेहरू के जन्मदिवस को बाल दिवस का नाम देकर व नेहरू गांधी खानदान के सदस्यों की जन्मतिथि व पुण्य तिथि को राष्ट्रीय पर्व व राष्ट्रीय शोक का दर्जा दिया। इसके उलट देश के प्रधानमंत्री मोदी ने सुभाषचंद्र बोस, वीर सावरकर, सरदार बल्लभ भाई पटेल, लालबहादुर शास्त्री जैसे अनेकों महापुरुषों की जयंतियों को विस्तृत रूप में मनाकर उन्हे अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री मोदी ने राजभवन को लोकभवन, राजपथ को कर्तव्यपथ, प्रधानमंत्री कार्यालय को सेवा तीर्थ किया।
महात्मा गांधी का प्रिय शब्द था राम
खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी व गांधी परिवार भगवान श्रीराम के नाम से नफरत करती है तभी योजना में भगवान श्रीराम के नाम पर आपत्ति कर रहे है जबकि गांधी जी का प्रिय शब्द था राम। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल तुष्टीकरण की राजनीति व संकुचित मानसिकता के कारण योजना में राम का नाम आने पर विरोध कर रही है जबकि मोदी जी ने योजना में राम का नाम लाकर गांधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है। भगवान श्रीराम का मंदिर 500 साल के संघर्ष के बाद बनकर तैयार हुआ है तब से आज दिनांक तक गांधी परिवार का कोई सदस्य व इंडी गठबंधन के नेता राम मंदिर में भगवान श्रीराम के दर्शन करने नहीं गये जबकि भगवान श्रीराम इस देश के हर जन के मन में व लोगों के प्राण में बसते हैं। उन भगवान श्रीराम के नाम को योजना के नाम में समाहित करने पर कांग्रेस इस बिल का विरोध कर रही है जो करोड़ो हिन्दुओं की आस्था पर कुठाराघात है।
योजना में पारदर्शिता को और बढ़ाने के लिए कई प्रावधान किए
खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि वीबी-जी रामजी योजना में और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए होने वाले कार्यों की जियो-टैगिंग, डिजिटल रिकॉर्डिंग एवं सूचना प्रबंधन प्रणाली तथा सभी श्रमिकों को त्वरित एवं उचित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल तथा बायोमेट्रिक भुगतान प्रणाली का प्रावधान किया गया है। पारदर्शिता के लिए ग्राम-सभा द्वारा सोशल ऑडिट भी कराने का प्रावधान है। नई योजना में पंचायतीराज संस्थाओं जैसे ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत तथा राज्य परिषद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। मंत्री राजपूत ने कहा कि वीबी-जी रामजी योजना में प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को न्यूनतम 125 दिन रोजगार या आजीविका का अवसर वैधानिक अधिकार है। महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों, खानाबदोस, महिला मुखिया परिवार, दिव्यांग मुखिया परिवार, छोटे व सीमांत किसानों के लिए भी रोजगार का प्रावधान किया गया है। अकुशल शारीरिक कार्यों की मजदूरी दरें केंद्र सरकार तय करेगी। यदि किसी ग्रामीण परिवार को मांग प्रस्तुत करने के पश्चात निर्धारित समय-सीमा में रोजगार नहीं मिलता तो निर्धारित दरों एवं शर्तों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता का भी प्रावधान किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेंगे रोजगार के साधन, रूकेगा पलायन
उन्होने बताया कि वीबी-जी रामजी से ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार उपलब्ध होगा, जिससे पलायन रुकेगा और परिवार एकजुट रहेंगे। गांवों में ही मजदूर उपलब्ध होने से खेती में श्रमिक संकट समाप्त होगा और किसान और अधिक आत्मनिर्भर बनेंगे। मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प को गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनेगी। मजदूरों की आय गांव में ही रहने से स्थानीय बाजार, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। योजना से किसान, मजदूर और गांव, तीनों को लाभ मिलेगा। यह योजना समाज के अंतिम पायदान पर खड़े मजदूरों और किसानों को आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान करेगी। महात्मा गांधी जी कहते थे कि भारत गांवों में बसता है। भारत का विकास करना है तो गांवों का विकास करना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महात्मा गांधी की उसी परिकल्पना को साकार करने के लिए वीबी-जी रामजी योजना बनाई है।
अधोसंरचना निर्माण के साथ आजीविका का दायरा बढ़ाया
मंत्री राजपूत ने जानकारी देते हुए कहा कि सुधारों के साथ लागू की जा रही नई योजना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब वर्ष में कभी भी मजदूरी प्राप्त कर सकते हैं। केंद्र सरकार 60 और राज्य सरकार 40 प्रतिशत की राशि वहन करेगी। कई मामलों में पहले केंद्र सरकार ही निर्णय लेता था, लेकिन अब राज्य सरकारें भी गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों के समुचित विकास को ध्यान में रखकर कार्यों को शामिल कर सकते हैं। नरेगा में विद्यालय भवन, पुस्तकालय, कोल्ड स्टोरेज, ग्रामीण पार्किंग, सौर ऊर्जा, नवकरणीय ऊजा, जैविक खाद इकाई, बाढ़ आश्रय स्थल, आपदा में क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत, जल जीवन मिशन के कार्यों में सुधार एवं रखरखाव जैसे कार्य शामिल नहीं थे। नई योजना में यह सभी कार्य शामिल किए गए हैं। जैविक खाद निर्माण इकाइयां, पशुपालन, मुर्गी-पालन शेड, मत्स्य पालन संबंधी निर्माण कार्य, नर्सरी निर्माण, भवन-निर्माण सामग्री उत्पादन इकाई निर्माण का प्रावधान भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आजीविका को बढ़ाने के लिए किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे
