उज्जैन, 18 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने कहाकि वीबी.जीरामजी योजना के तहत ग्रामीण रोजगार ग्राम विकास ओर सामाजिक स्थिरता के साधन हैं। वृद्धिशील सुधार की जगह संरचनात्मक बदलाव की जरूरत को समझते हुए एनडीए सरकार ने विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन:ग्रामीण गारंटी अधिनियम बनाया और इसे कानून बनाया।
मंत्री टेटवाल ने रविवार को भाजपा कार्यालय लोकशक्ति पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह अधिनियम मनरेगा की जगह लेता है और ग्रामीण रोजगार को सतत विकास का साधन बनाता है। जो विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप है।
उन्होने कहाकि ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों ने भारत की सामाजिक आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये केवल कमजोर परिवारों को आय की सुरक्षा नहीं देते बल्कि परिसम्पति निर्माण के साथ ग्राम विकास और सामाजिक स्थिरता के साधन भी है। चुंकि बड़ी संख्या में लोग कृषि और उससे जुड़े कामों पर निर्भर है, इसीलिए मौसमी बेरोजगारी और आय में उतार चड़ाव लगातार चुनौती बने रहते है। वर्ष-2006 में महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम,मनरेगा0 ने इन समस्याओ को हल करने और मजदूरी रोजगार की गारंटी देने का प्रयास किया।
टेटवाल ने कहा कि शुरूआती वर्षों में कई परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की, लेकिन कमजोर प्रशासन, भ्रष्टाचार और विकास उन्मुख दृष्टिकोण की कमी के कारण इसका दीर्घकालिक प्रभाव कमजोर रह गया। नई योजना में काम के दिन ज्यादा होंगे। साथ ही मजदूरों को पारिश्रमिक भी जल्दी मिलेगा। हर ग्रामीण परिवार को हर वर्ष 125 दिन के रोजगार की गारंटी मिलेगी। वन क्षेत्र में काम करने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग के कामगारों को 25 दिन का रोजगार अधिक मिलेगा। मनरेगा पर सबसे अधिक खर्च मोदी सरकार ने किया है। मनरेगा पर अब तक 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए जिसमें मोदी सरकार ने 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
टेटवाल ने कहा कि वर्ष-1980 में इंदिरा गांधी ने सभी पुरानी रोजगार योजनाओं को मिला कर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम योजना का नाम दिया जिसे राजीव गाँधी ने जवाहर रोजगार योजना का नाम दे दिया। मनमोहन सरकार ने वर्ष-2004 में इसे नरेगा कर दिया। फिर वर्ष-2005 में मनरेगा किया गया। इसी तरहए आवास योजना का नाम पहले ग्रामीण आवास योजना था। राजीव गांधी ने वर्ष-1985 में इसका नाम बदल कर इंदिरा आवास योजना कर दिया था। अप्रैल-2005 में कांग्रेस सरकार ने ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना कर दिया। हर योजना में कांग्रेस ने एक परिवार के नाम डाले। मोदी सरकार में नाम नहीं,काम बोलता है।
उन्होने बताया कि वर्ष-2005 में मनरेगा शुरू हुई,लेकिन अब ग्रामीण भारत बदल गया है। 2011-12 में ग्रामीण गरीबी 25.7 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 4.86 प्रतिशत रह गई। साथ ही कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है और आजीविका में विविधता आई है। पुराना ओपन एंडेड मॉडल आज की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से मेल नहीं खाता। वर्ष-2005 में हमारी जरूरतें अलग थीं, अब हमारी जरूरतें अलग हैं। इसलिए इस ग्रामीण रोजगार योजना को वर्ष-2025 की आवश्यकताओं के साथ पुन: व्यवस्थित करना आवश्यक था।
इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया, ग्रामीण जिलाध्यक्ष राजेश धाकड़ , विधायक सतीश मालवीय एवं अनिल जैन कालूहेड़ा,निगम सभापति कलावती यादव, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी सचिन सक्सेना, मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा,सह मीडिया प्रभारी राकेश पंड्या,जगदीश पांचाल,कमल बैरवा उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल
