कांकेर, 18 जनवरी (हि.स.)। जिले में धर्मांतरण को लेकर लंबे समय से जारी विवाद के बीच ग्राम पीढापाल क्षेत्र के 200 से अधिक धर्मांतरित ग्रामीणाें ने ईसाई धर्म छोड़कर अपने मूल सनातन धर्म में घर वापसी कर ली है। इस घटना से जिले में धर्मांतरण के खिलाफ चल रही मुहिम का असर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार सभी 200 से अधिक धर्मांतरित ग्रामीण पीढापाल क्षेत्र के रहने वाले हैं और लंबे समय तक धर्मांतरण विवाद के केंद्र में रहे। ग्रामीणों ने अपने फैसले में स्थानीय परंपराओं और सामाजिक मान्यताओं को महत्व दिया। जिले में धर्मांतरण को लेकर पिछले कुछ समय से जारी चर्चा और मुहिम के बीच घर वापसी का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने भी इस प्रक्रिया में सहयोग किया है। हिंदू समाज के लोगों ने इन सभी का स्वागत किया है।
इन परिवारों ने स्वेच्छा से ईसाई धर्म छोड़कर सनातन धर्म को अपना लिया है। रविवार काे सामूहिक रूप से आयोजित कार्यक्रम में 200 से भी अधिक ग्रामीणों ने हिंदू रीति-रिवाज से पूजा-पाठ किया और शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी कर सनातन धर्म अपना लिया है। आमाबेड़ा में शव दफनाने को लेकर हुई हिंसा के बाद हिंदू संगठनों और स्थानीय समाज द्वारा घर वापसी अभियान को गति दी गई है। यहां तक कि बड़ेतेवड़ा में हुई घटना के बाद उस इलाके के चर्च प्रमुख ने भी सनातन धर्म में वापसी कर ली है।
उल्लेखनीय है कि घर वापसी करने वालों ने बताया कि धर्मांतरण के लिए किसी प्रकार का आधिकारिक दस्तावेज नहीं होता। घर वापसी करने वाले लोगों ने दावा किया कि ईसाई मिशनरी उन्हें हिंदुओं के खिलाफ भड़काती थी और देवी-देवताओं की पूजा न करने की सलाह दी जाती थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे
