भुवनेश्वर, 19 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष उत्सव के अवसर पर भुवनेश्वर के डुमुडुमा नगर में एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में नागरिकों, युवाओं, महिलाओं एवं वरिष्ठजनों ने भाग लेकर हिंदू समाज की एकता और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ 108 कुंडीय वैदिक अग्निहोत्र के साथ हुआ, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चारण से पूरा परिसर भक्तिमय और यज्ञमय हो उठा। पतंजलि योग समिति और भुवनेश्वर आर्य समाज के सहयोग से आयोजित इस अनुष्ठान ने सम्मेलन को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।
सम्मेलन के दौरान गोभक्तों ने गोमाता का पूजन किया और देश में गोहत्या बंद करने की प्रार्थना की। इसके पश्चात भागवत पाठ और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें “जय श्रीराम” के जयघोष से पूरा मैदान गूंज उठा।
इस अवसर पर भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सैनिकों को मंच पर सम्मानित किया गया। पूर्व सैनिक विद्याधर नायक ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सनातन संस्कृति और हिंदू आस्था का देश है तथा सभी नागरिकों को जाति और पंथ से ऊपर उठकर भारत माता की संतान के रूप में एकजुट होना चाहिए।
सम्मेलन में राष्ट्रीय हिंदू संगठन के केंद्रीय प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष जनरल दीनबंधु षडंगी ने भी सहभागिता की और आरएसएस की भूमिका की सराहना की। उन्होंने हिंदू समाज से एकता और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया।
बौद्धिक सत्र में मुख्य वक्ता पुरी जिला प्रचार प्रमुख जयकृष्ण पृष्टि ने कहा कि आरएसएस पिछले सौ वर्षों से निस्वार्थ सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के माध्यम से हिंदू समाज को संगठित कर रहा है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष उत्सव हिंदू समाज के स्वाभिमान और भविष्य के लिए एक नए संकल्प का प्रतीक है।
कार्यक्रम शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। सम्मेलन में वेटरन विमल प्रसाद बारिक, सेवानिवृत्त मार्कोस रवींद्र कुमार साहू, रमाकांत पंडा, मनोज कुमार साहू, देवाशीष साहू, प्रणब कुमार पाणि, निरंजन साहू, शरत चंद्र नायक और सुषमा पंडा सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता महंतो
