हुगली, 19 जनवरी (हि.स.)। हुगली जिले के चंडीतला में सोमवार को 75 बूथ लेवल ऑफिसरों (बीएलओ) ने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) के पास सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। बीएलओ का आरोप है कि एक ओर अत्यधिक काम का दबाव है, तो दूसरी ओर मतदाता आंकड़ों में भारी विसंगतियां हैं, जिसके चलते हजारों नोटिस जारी किए जा रहे हैं और आम लोगों को बेवजह परेशान होना पड़ रहा है।
बीएलओ का कहना है कि वे इस असहनीय कार्यभार और जनता की नाराजगी दोनों को संभाल पाने में असमर्थ हो गए हैं।
इससे पहले हावड़ा जिले में भी 17 बीएलओ ने इस्तीफा दिया था। हावड़ा के डोमजुड़ विधानसभा क्षेत्र के बांकड़ा एक और दो नंबर पंचायतों में एसआईआर कार्य में नियुक्त बीएलओ ने चुनाव आयोग पर अत्यधिक दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया था। अब वही स्थिति हुगली में भी सामने आई है, जहां बीएलओ ने आम लोगों की परेशानी का हवाला देते हुए पद छोड़ने का कदम उठाया है।
सोमवार दोपहर चंडीतला-1 नंबर बीडीओ कार्यालय के सामने बीएलओ ने चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने लिखित रूप में अपना इस्तीफा ईआरओ को सौंपा। बीएलओ का आरोप है कि चुनाव आयोग ने पहले स्पष्ट किया था कि यदि किसी व्यक्ति का नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज है तो उसे सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा। इसके बावजूद नाम की मामूली वर्तनी की त्रुटियों के कारण भी लोगों को सुनवाई के नोटिस थमाए जा रहे हैं।
बीएलओ का कहना है कि ऐसे मामलों में आम लोग सवाल पूछते हैं, जिनका जवाब देना उनके लिए मुश्किल हो जाता है और इससे उनका काम कई गुना बढ़ जाता है। एक बीएलओ ने कहा, जिन लोगों को नोटिस देकर बुलाया जा रहा है, वे पूछते हैं कि मां की उम्र बच्चों से कम कैसे हो सकती है। पुराने समय में कम उम्र में शादी हो जाती थी। अगर कोई 13 साल में शादी करे और 14 साल में बच्चा हो जाए तो इसमें मतदाता की क्या गलती है? फिर महिलाओं को नोटिस भेजकर पूछा जा रहा है कि शादी से पहले और बाद में उपनाम अलग क्यों है। उनसे यह साबित करने को कहा जा रहा है कि वे एक ही व्यक्ति हैं।”
बीएलओ के अनुसार, ऐसे सवालों और प्रक्रियाओं के कारण जनता में भारी नाराजगी है और इसका दबाव सीधे उन पर पड़ रहा है। फिलहाल बीएलओ के सामूहिक इस्तीफे से एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय
