कोलकाता, 19 जनवरी (हि. स.)। भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल के मुख्य प्रवक्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता देबजीत सरकार ने सोमवार को साल्ट लेक स्थित पार्टी कार्यालय से राज्य की मौजूदा स्थिति को लेकर मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में अराजकता का माहौल बना दिया है, जिसकी भाजपा कड़ी निंदा करती है।
अपने वक्तव्य की शुरुआत में देबजीत सरकार ने कहा कि देश के अन्य हिस्सों में भले ही संवैधानिक संकट की चर्चा हो, लेकिन पश्चिम बंगाल में पूरी संवैधानिक व्यवस्था को ही चुनौती दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी के उकसावे पर पार्टी विधायक और जिला स्तरीय नेता राज्य के लोकतांत्रिक तंत्र पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीएलओ, ईआरओ और एईआरओ ही नहीं, बल्कि फॉर्म-सात जमा करने गए आम नागरिकों और विपक्षी नेताओं के साथ भी मारपीट और उत्पीड़न किया गया।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कई स्थानों पर हालात बेहद गंभीर हैं। एक बीडीओ कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया, सड़कों पर तोड़फोड़ की गई और अनुसूचित जनजाति समुदाय से आने वाले एक बीएलओ पर हमला किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल नेता अब्दुल रहीम गाजी ने डानकुनी में बीएलओ बिमली टुडू हांसदा को जूते से पीटा। भाजपा ने इन घटनाओं की तीखी निंदा करते हुए कहा कि यदि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में यह कुशासन जारी रहा, तो भारत निर्वाचन आयोग को कठोर कानूनी कार्रवाई करनी होगी।
देबजीत सरकार ने कहा कि फॉर्म-सात जमा करने के दौरान जिस तरह की परिस्थितियां बनाई जा रही हैं, उससे लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने मांग की कि फॉर्म-सात की ऑनलाइन प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से सुनिश्चित की जाए, अन्यथा राज्य में लोकतंत्र का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मृत मतदाताओं, रोहिंग्या मुसलमानों, बांग्लादेशी घुसपैठियों और अवैध प्रवासियों के नाम मतदाता सूची में बने रहना लोकतंत्र के लिए घातक है।
उन्होंने बताया कि बीते चौबीस घंटों में एसआईआर मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में राज्य के विभिन्न हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन किए गए। आसनसोल दक्षिण में एसडीओ कार्यालय के सामने फॉर्म-सात जमा करने को लेकर हुए प्रदर्शन में भाजपा विधायकों पर तृणमूल कार्यकर्ताओं और प्रशासन के एक हिस्से ने हमला किया। कल्याणी में भाजपा विधायक एवं अधिवक्ता अंबिका रॉय जब फॉर्म-सात जमा करने पहुंचे तो उन पर हमला किया गया और धमकियां दी गईं। देगंगा में एक विशेष वैचारिक संगठन द्वारा एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन किया गया, जिससे पुलिस पर हमले जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
देबजीत सरकार ने आगे बताया कि कुलपी के कमरचक ग्राम पंचायत के बूथ संख्या सौ में बीएलओ मालती मंडल पर हमला किया गया। उनके घर को घेरकर परिवार को धमकाया गया, जबकि पुलिस द्वारा उठाए गए कदम उनकी सुरक्षा के लिए अपर्याप्त हैं। बसंती में भी तृणमूल समर्थित लोगों ने प्रदर्शन के नाम पर राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया और आगजनी की।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुंचुड़ा में तृणमूल विधायक आसित मजूमदार ने फॉर्म-सात जमा करने आए लोगों के फॉर्म फाड़े और उनके साथ मारपीट की। भाजपा प्रवक्ता ने मांग की कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार स्वयं पश्चिम बंगाल आएं और देखें कि एसआईआर प्रक्रिया किस तरह बाधित की जा रही है।
देबजीत सरकार ने बताया कि सोमवार को भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय पहुंचा और एसआईआर से जुड़ी तमाम घटनाओं को उनके संज्ञान में लाया। उन्होंने कहा कि यदि इन गतिविधियों पर तत्काल रोक नहीं लगी, तो राज्य की पूरी चुनावी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचेगा। भाजपा ने स्पष्ट किया कि वह न केवल इन घटनाओं की निंदा करेगी, बल्कि राज्य की जनता के साथ मिलकर इसके खिलाफ आंदोलन भी करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
