हमीरपुर, 19 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के सुमेरपुर कस्बे में धर्मांतरण का दबाव, गैंगरेप के आरोपितों के पूर्वजों का कारोबार एक आटा चक्की एवं आरा मशीन से शुरू हुआ। मौलाना खान के पिता लल्लू भाईजान के समय तक यह कारोबार आरा मशीन और लकड़ी की छोटी-मोटी खरीद फरोख्त तक सीमित रहा।
वर्ष 2000 के दशक में मौलाना खान का राजनीति में पदार्पण हुआ और बसपा से नजदीकियां बनी। वर्ष 2007 में बसपा की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नसीमुद्दीन का बरदहस्त प्राप्त होते ही मौलाना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अधाधुंध अवैध कटान से अकूत दौलत जुटाई और इसको सीधे मोरंग खदानों में लगा दिया। महज कुछ ही वर्षों में यह अरबपति हो गया। इसके बाद कस्बा सहित मौदहा और आसपास के गांव में करोड़ों रुपये की बेनामी सम्पत्तियां खरीदी। आज भी मोरंग के व्यवसाय से जुड़ा हुआ है।
इस घटना के बाद प्रशासन ने लकड़ी के कारोबार पर पूरी तरह से शिकंजा कस दिया है। आरा मशीन के साथ बाहर भेजे जाने वाली लकड़ी की अड्डियां बंद कर दी हैं। लेकिन अन्य कारोबार पर अभी कोई कार्यवाही नहीं हुई है। प्रशासन मौलाना खान की सम्पत्तियों का ब्योरा जुटाने में लगा हुआ है। सूत्रों का दावा है कि प्रशासन ने एक टीम बनाकर सम्पत्ति का ब्योरा तलब किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा
