भाेपाल, 28 जनवरी (हि.स.)। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश एवं मुख्य सचिव की 5वीं कॉन्फ्रेंस के अनुक्रम में बुधवार को, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में भोपाल स्थित पलाश रेसीडेंसी के सभागार में राज्य के समस्त सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं की बैठक हुई। बैठक में मंत्री परमार ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर, आवश्यक निर्देश दिए।
बैठक में उच्च शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक 15 जनवरी 2026 को क्रिमिनल अपील क्रमांक 1425 में पारित आदेश के अनुपालन में निर्णय लिया गया कि किसी भी छात्र की आत्महत्या अथवा अप्राकृतिक मृत्यु की जानकारी मिलते ही संबंधित शैक्षणिक संस्थान द्वारा तत्काल पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होगा, चाहे घटना संस्थान परिसर के भीतर हुई हो या बाहर। इसके अतिरिक्त, ऐसी घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) एवं संबंधित नियामक संस्थाओं को प्रस्तुत करना भी आवश्यक होगा।
बैठक में मंत्री परमार ने कहा कि आवासीय शैक्षणिक संस्थान में 24×7 आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए अथवा निकटतम एक किलोमीटर की परिधि में ऐसी सुविधा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने लंबे समय से रिक्त शिक्षण एवं गैर-शिक्षण पदों को चार माह की अवधि में भरने तथा आरक्षित वर्गों के पदों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए हैं। मंत्री परमार ने कहा कि छात्रों की सभी लंबित छात्रवृत्तियों का समयबद्ध निराकरण किया जाए तथा छात्रवृत्ति में विलंब के कारण किसी भी छात्र को परीक्षा, कक्षा, हॉस्टल अथवा डिग्री/मार्कशीट से वंचित न किया जाए। मंत्री परमार ने शैक्षणिक संस्थाओं को UGC के सभी बाध्यकारी विनियमों, विशेषकर रैगिंग निरोधक व्यवस्था, समान अवसर प्रकोष्ठ, आंतरिक शिकायत समिति एवं छात्र शिकायत निवारण तंत्र के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। मंत्री परमार ने कहा कि छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया जाये।
बैठक के प्रमुख निर्णय ( मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन, नई दिल्ली में दिए गए निर्देशों के संबंध में)
बैठक में निर्णय लिया गया कि वैश्विक प्रतिभा वापसी योजना का शुभारंभ, सभी राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति, अधिक रिक्तियों वाले विश्वविद्यालयों में मिशन मोड में संकाय भर्ती, पाठ्यक्रमों को अद्यतन, कौशल एवं अप्रेंटिसशिप आधारित डिग्री कार्यक्रमों की शुरुआत, एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाना को लागू किया जाएगा। बैठक में भारत में विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना/आशय पत्र जारी किए जाने, उभरती प्रौद्योगिकियों में संकाय प्रशिक्षण, नामांकन वृद्धि, कौशल पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की भागीदारी, नवाचार एवं इन्क्यूबेशन केंद्रों को सुदृढ़ करने तथा अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने पर भी चर्चा हुई।
अन्य महत्वपूर्ण निर्देश
मंत्री परमार ने सभी विश्वविद्यालयों को परीक्षा प्रणाली में डिजिटल मूल्यांकन (Digital Evaluation) को चरणबद्ध रूप से अनिवार्य रूप से अपनाने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने विश्वविद्यालयों को अपनी अकादमिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों के लिए SAMARTH डिजिटल प्लेटफॉर्म को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश भी दिए। PM-USHA योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालयों को आवंटित राशि का निर्धारित समय-सीमा में विभिन्न मदों में पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मंत्री परमार ने विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार, नवाचार, अनुसंधान एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा को प्राथमिकता देने को कहा। छात्र-शिक्षक अनुपात, परीक्षा सुधार, परिणामों की समयबद्ध घोषणा एवं डिजिटल पारदर्शिता पर विशेष जोर भी दिया। मंत्री परमार द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि उच्च शिक्षा में न्यायालयीन निर्देशों एवं राष्ट्रीय नीतिगत लक्ष्यों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक के अंत में मंत्री परमार ने सभी विश्वविद्यालयों से अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि वे लिए गए निर्णयों का गंभीरता से अनुपालन सुनिश्चित करें, जिससे प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं छात्र-केन्द्रित बन सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे
