दरभंगा, 28 जनवरी (हि.स.)।दरभंगा जिले के तारडीह प्रखंड अंतर्गत सकतपुर थाना क्षेत्र के मदरिया गांव स्थित एक राजकीय प्राथमिक विद्यालय में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान एक बच्चे के साथ कथित अपमान का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक कमलापति मिश्र ने प्रसाद वितरण के दौरान एक बच्चे को दुत्कार कर लौटा दिया, जिससे आहत होकर बच्चे ने घर पहुंचकर अपने पिता सत्यनारायण मुखिया से इसकी शिकायत की।
सत्यनारायण मुखिया के अनुसार उनका पुत्र मात्र आठ वर्ष का है, जो प्रसाद के लिए सामान्य बच्चों की तरह जिद कर रहा था। उन्होंने शिक्षक से यह कहकर आपत्ति जताई कि यदि थोड़ी-सी बुनियां मिठाई बच्चे की हथेली पर फिर से रख दी जाती तो क्या नुकसान हो जाता। इसी बात को लेकर विद्यालय परिसर में कहासुनी हो गई।
आरोप है कि इसी दौरान अनुकंपा पर नियुक्त सहायक शिक्षक कमलापति मिश्र ने सत्यनारायण मुखिया का कॉलर पकड़ लिया। इसके बाद विवाद ने उग्र रूप ले लिया और प्रतिकार में सत्यनारायण मुखिया द्वारा कमलापति मिश्र के साथ मारपीट की गई, जिससे कमलापति मिश्र के दोनों जबड़ों में चोट व सूजन आ गई। घायल शिक्षक ने इस संबंध में सकतपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई है।
घटना को लेकर गांव में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकार गणतंत्र दिवस समारोह के लिए हजारों रुपये की राशि उपलब्ध कराती है, तो उसका उद्देश्य बच्चों के चेहरे पर खुशी लाना है, न कि उन्हें अपमानित करना। गरीब परिवार से आने वाले बच्चे के साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल अमानवीय है, बल्कि शिक्षक की गरिमा के भी विपरीत है।
कुछ ग्रामीणों ने शिक्षक के विरुद्ध गिरफ्तारी, मुकदमा और विभागीय कार्रवाई की मांग की है। वहीं अब तक शिक्षा विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
हालांकि कमलापति मिश्र के समर्थन में शिक्षक नारायण झा सहित अन्य शिक्षकों ने मारपीट की घटना की निंदा की है और इसे कानून-व्यवस्था का उल्लंघन बताया है।
सत्यनारायण मुखिया का कहना है कि बिहार सरकार बाल स्वाभिमान और बच्चों के सर्वांगीण विकास पर करोड़ों रुपये खर्च करती है। ऐसे में गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर एक बच्चे को ‘भिखारी’ की तरह प्रसाद के लिए अपमानित किया जाना अत्यंत निंदनीय है।
जानकारों और बुद्धिजीवियों का मत है कि इस तरह का व्यवहार बच्चों के कोमल मन पर गहरा आघात पहुंचाता है और यह बिहार शिक्षा नीति की मूल भावना के विपरीत है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित शिक्षक द्वारा पूर्व में भी बच्चों के साथ कठोर और अमानवीय व्यवहार किया गया है।
फिलहाल मामला पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों के संज्ञान में है, और ग्रामीण निष्पक्ष जांच व कठोर कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra
