देहरादून, 28 जनवरी (हि.स.)। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के सभागार में बुधवार को युवा रचनाकार डॉ. नवनीत सिंह के कविता संग्रह ‘पानी के अभिलेख’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि राजेश सकलानी और सामाजिक कार्यकर्ता व कवि लोकेश नवानी ने संग्रह पर चर्चा की और संग्रह की कुछ कविताओं का पाठ किया गया।
इस माैके पर वक्ताओं ने कहा कि संग्रह में पानी के विविध रूपों और अर्थों के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना को रेखांकित किया गया है। कविताओं में पर्वतीय समाज, प्राकृतिक परिवेश और वहां के लोगों की जीवनशैली को भी चित्रित किया गया है। ‘चांदी का झरना’, ‘पर्वत की चादर’ और ‘संध्या झूला झूलती’ जैसी कविताओं में रहस्यवादी और दार्शनिक भाव झलकते हैं। इस माैके पर पुस्तक के लेखक डॉ. नवनीत सिंह ने कहा कि उनकी कविताओं के माध्यम से समकालीन समाज में दोहरे मापदंडों, पर्यावरण संकट और सांस्कृतिक मूल्यों पर प्रकाश डाला गया है। उन्होंने बताया कि ‘नदी का हक’ जैसी कविताएं प्राकृतिक मूल स्वरूप की रक्षा और समाज में संतुलन बनाए रखने की चेतावनी देती हैं।
वरिष्ठ कवि लोकेश नवानी ने कविता को जीवन देखने और महसूस करने का माध्यम बताया। समालोचक राजेश सकलानी ने नवनीत की कविताओं में परिपक्वता और गहन संवेदना को सराहा। कार्यक्रम का संचालन मोहित नेगी ने किया। कार्यक्रम में पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. डीके पाण्डे, कार्यक्रम अधिकारी चंद्रशेखर तिवारी सहित कई साहित्यकार, युवा पाठक और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय
