
–भोजन, भजन, भ्रमण, भाषा और भेष सभी का एक जैसा होना चाहिए
–बबीना के रक्सा मण्डल में विराट हिन्दू सम्मेलन आयोजित
झांसी, 28 जनवरी (हि.स.)। संघ स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने पर बुधवार को सकल हिन्दू समाज द्वारा बबीना खंड रक्सा के एक विवाह घर में विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कानपुर प्रान्त के प्रांत प्रचारक श्रीराम ने समरसता का उदाहरण देते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम से बड़ा समरसता का कोई उदाहरण नहीं है। उन्होंने जाति-पाति के भेदभाव को दूर करने का आह्वान करते हुए कहा कि भोजन, भजन, भ्रमण, भाषा और भेष सभी का एक जैसा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित किए जा रहे हैं। विश्व में केवल भारत को ही मां का दर्जा प्राप्त है। किसी अन्य को नहीं। भगवान राम भी सामान्य व्यक्ति थे। अपनी भारतीय संस्कृति में बड़ों की बात मानी जाती रही है। राम वन नहीं जाते तो राम बन नहीं पाते। वन में सबरी के पास पहुंच गए। वहां सबरी के जूठे बेर खाकर समरसता का उदाहरण प्रस्तुत किया। जटायु का अंतिम संस्कार भी भगवान राम ने किया। लंकापति रावण से युद्ध के दौरान अपनों को सूचना नहीं देते बल्कि आदिवासियों व कोल भीलों को संग लेकर युद्ध जीतते हैं। इससे बड़ा समरसता का उदाहरण हो नहीं सकता। उन्होंने कहा कि भगवान राम की तरह ही संघ कार्य कर रहा है। उन्होंने श्रीकृष्ण का उदाहरण भी दिया। अंग्रेजों ने जब आक्रमण किया तो हमारे देश के नौजवानों ने फांसी का फंदा चूमने का काम स्वीकार किया परतंत्रता ठुकरा दी।
उन्हाेंने बताया कि हेडगेवार जी ने खोजा कि आखिर गुलामी क्यों ? राम से लेकर कृष्ण, सरस्वती समेत अम्बेडकर तक ने भारत को भारत बनाए रखने के लिए कार्य किया। आज हिन्दू समाज अपनी विजय का इतिहास लिख रहा है। प्रभु श्रीराम का मंदिर निर्माण इसका उदाहरण है। भारतीय संस्कृति की योग परम्परा को पूरा विश्व स्वीकार रहा है। विश्व के सभी देशों के लोगों को कोरोना की दवा खिलाई। विश्व की मंगल कामना करने वाला अगर कोई है तो वह हिन्दू है। रामसेतु तोड़ने की बात पर तीन घंटे के चक्का जाम ने सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि हिंदुत्व के आस्था पर कुठाराघात नहीं किया जा सकता। विवेकानंदजी ने कहा था कि गर्व से कहो हम हिन्दू हैं। संघ उसी को चरितार्थ करने का काम कर रहा है। आज हमारे देश के प्रधानमंत्री का सम्मान विश्व के सभी देशों में किया जाता है। मंगल ग्रह से लेकर हम हर क्षेत्र में बढ़ रहे हैं। आज हमारे स्व का भान हमें हो रहा है। हिंदुत्व पर कुठाराघात भी किया जा रहा है। आज कई चुनातियां हमारे सामने हैं।
पहली चुनौती लव जिहाद की है। लव जिहाद किसी एक जाति की लड़की के साथ नहीं सभी हिन्दू भाइयों के घरों में हो रहा है। कोई भी विधर्मी यदि हरकत करता है तो उसके खिलाफ एकजुट रहें। इसका जनजागरण आवश्यक है। उन्होंने कश्मीर में होने वाले घटनाक्रम का भी उदाहरण दिया। कहा 26 बहनों के सिंदूर उजाड़े गए। लैंड जिहाद पर भी विचार करना होगा। राजनैतिक दल के लोग घुसपैठियों के प्रमाणपत्र बनवाते हैं। तीसरी समस्या धर्मांतरण की है। चौथी समस्या जनसंख्या असंतुलन। इस पर भी ध्यान देना होगा। इसलिए हम दो हमारे तीन के प्रति जनजागरण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा यदि झुग्गी झोपड़ी तक पहुंच जातिप्रथा पर विराम नहीं लगेगा तो हमारे घरों में एके- 47 लहराने वाले लोग रहेंगे। कुल मिलाकर पंच परिवर्तन पर हमें विचार करना होगा। भोजन, भजन, भ्रमण, भाषा और भेष सभी का एक जैसा होना चाहिए।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि झांसी विभाग कार्यवाह शिवकुमार भार्गव ने कहा कि यह संघ के शताब्दी वर्ष के साथ वंदेमातरम का भी शताब्दी वर्ष है। उन्होंने केशव जी के जीवन के शुरुआती दिनों में घटित घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने भारत भूमि का गुणगान करते हुए भारत को उपासनाओं की भूमि बताया। उन्होंने बताया कि हमारे यहां जाति प्रथा नहीं थी। भारतीय परम्परा में कोई भेदभाव की बात नहीं करता। आज प्रयागराज में माघ मेला में जाति पांति कौन पूछता है।
सिद्ध बाबा स्थल बमेर महंत घनश्याम ने कहा कि यदि हम आपस में दु:ख में एक दूसरे के साथ रहें। जाति पाति के भेदभाव को दूर करना है। धर्म विरोधियों से सावधान रहना है। हमें एक दूसरे के साथ रहना है। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिवराम शरण महाराज मढ़ीला सरकार ने की। संचालन प्राचार्य मॉर्निंग स्टार पब्लिक स्कूल अरविंद कुमार झा ने किया। अंत में मां भारती की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर महानगर प्रचारक सक्षम, विमल, मुन्नालाल, धर्मेन्द्र, जशवंत, अभिषेक, अनुज, विजय, राहुल, पुष्पेन्द्र, राजेन्द्र, बिसवारी, अशोक मिश्रा, महेंद्र प्रताप,अमरदीप दुबे,आयुष, आशीष योगी,रोहित परमार,शिवम गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया
