मीरजापुर, 28 जनवरी (हि.स.)। ड्रमंडगंज क्षेत्र के बबुरा कलां गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथावाचक पंडित प्रेम मूर्ति महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए शुकदेव मुनि और राजा परीक्षित की प्रेरक कथा का भावपूर्ण रसपान कराया।
कथावाचक प्रेम मूर्ति महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति नित्य परायण होकर सात दिनों तक श्रद्धा और नियमपूर्वक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर भगवान की परम भक्ति को प्राप्त करता है। राजा परीक्षित ने भागवत कथा के श्रवण से ही मृत्यु के भय पर विजय पाई और भगवान के परमधाम को प्राप्त हुए।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य के जीवन से शोक, भय और मृत्यु का डर समाप्त हो जाता है। कथा मन को शांति देती है और आत्मा को परम सत्य से जोड़ती है। भगवान अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए पृथ्वी पर अवतार लेते हैं तथा आसुरी शक्तियों का संहार कर भक्तों की रक्षा करते हैं।
कथा व्यास ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अपने प्रारब्ध का फल भोगना पड़ता है, किंतु भक्ति के मार्ग से जीवन सरल और सार्थक बनता है। कथा के समापन पर श्रीमद्भागवत महापुराण एवं भगवान श्रीकृष्ण की भव्य आरती उतारी गई तथा श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा
