नई दिल्ली, 27 जनवरी (हि.स.)।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानि एम्स में ट्रांसजेंडर के साथ जेंडर बदलवाने की सर्जरी के मामलों में इजाफा हुआ है। मंगलवार को एम्स ने प्लास्टिक सर्जरी विभाग में संपन्न जेंडर-अफर्मिंग और जेंडर-रिफाइनिंग सर्जरी से जुड़े ताजा आंकड़े जारी किये। विभाग के अनुसार वर्ष 2023 से जनवरी 2026 तक कुल 195 चिकित्सा प्रक्रियाएं की गईं, जिनमें 139 प्रमुख सर्जरी और 56 माइनर प्रक्रियाएं शामिल हैं।
जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में 33 जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी की गईं, जबकि 106 जेंडर-रिफाइनिंग सर्जरी दर्ज की गईं। वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023 में 14, 2024 में 36, 2025 में 66 और जनवरी 2026 तक 20 मामले सामने आए। कुल मिलाकर ट्रांस-मेन के 67 और ट्रांस-वूमन के 72 मामलों में प्रमुख सर्जरी की गई, जिससे कुल संख्या 139 तक पहुंच गई।
एम्स के प्लास्टिक, रीकंस्ट्रक्टिव एवं बर्न्स सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष सिंघल के मुताबिक जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी (जीएएस) के अंतर्गत वेजिनोप्लास्टी और फैलोप्लास्टी जैसी जटिल शल्य प्रक्रियाएं शामिल हैं। वहीं जेंडर-रिफाइनिंग सर्जरी (जीआरएस) में ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन, टॉर्सो मैस्कुलिनाइजेशन, फेशियल सर्जरी (हेयरलाइन रीशेपिंग और फोरहेड कंटूरिंग), राइनोप्लास्टी, जॉ सर्जरी, वॉयस सर्जरी और एडम्स एप्पल शेव जैसी प्रक्रियाएं की जाती हैं।
इसके अलावा 56 माइनर प्रक्रियाओं में बोटुलिनम टॉक्सिन इंजेक्शन, डर्मल फिलर्स, लेजर ट्रीटमेंट, थ्रेड लिफ्ट्स, हेयर ट्रांसप्लांटेशन और फैट ग्राफ्टिंग को शामिल किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ये सभी आंकड़े अस्पताल के रिकॉर्ड के आधार पर रिट्रोस्पेक्टिव तरीके से संकलित किए गए हैं। ये आंकड़े देश में जेंडर-अफर्मिंग और जेंडर-रिफाइनिंग चिकित्सा सेवाओं की बढ़ती मांग और स्वास्थ्य प्रणाली में इनके विस्तार को दर्शाते हैं।
जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी?
यह विभिन्न सर्जिकल प्रक्रियाओं का एक समूह है जो ट्रांसजेंडर, नॉन-बाइनरी और जेंडर-डाइवर्स लोगों के शरीर को उनकी लैंगिक पहचान के साथ संरेखित करने में मदद करती है। ये सर्जरी फेशियल फेमिनाइजेशन, शारीरिक छवि, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए की जाती हैं।
जेंडर-रिफाइनिंग सर्जरी?
ये सर्जरी, उन सर्जिकल प्रक्रियाओं की एक श्रृंखला है जो ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी व्यक्तियों के शारीरिक अंगों को उनकी लिंग पहचान के अनुरूप बदलती है। यह शारीरिक और भावनात्मक रूप से अधिक सहज महसूस करने में मदद करती है। इसमें हार्मोन थेरेपी और मनोवैज्ञानिक सहायता भी शामिल हो सकती है।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी
