पूर्वी सिंहभूम, 28 जनवरी (हि.स.)। जिले के सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के लाल भट्टा इलाके में हर वर्ष जनवरी माह में आयोजित होने वाली ग्राम पूजा के दौरान की जाने वाली अमानवीय मुर्गा बलि की प्रथा को इस वर्ष रोक दिया गया। इस परंपरा के तहत पूजा के बाद जीवित मुर्गों को आम लोगों के बीच छोड़ दिया जाता था, जिसके बाद उन्हें पकड़ने की होड़ में भीड़ मुर्गों को फाड़ दिया जाता था। इस क्रूर प्रथा की जानकारी मिलने पर पशु अधिकार संगठन पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (पेटा इंडिया) ने मामले में हस्तक्षेप किया और जिला पुलिस से संपर्क कर कार्रवाई की मांग की।
पेटा इंडिया के संज्ञान में यह मामला आने के बाद पूर्वी सिंहभूम जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने त्वरित कदम उठाते हुए ग्राम पूजा के आयोजकों को नोटिस जारी किया। नोटिस में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया कि पूजा के बाद किसी भी स्थिति में जीवित मुर्गे को आम लोगों के बीच नहीं छोड़ा जाएगा, क्योंकि यह पशु क्रूरता की श्रेणी में आता है और कानूनन दंडनीय अपराध है। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी कि निर्देशों का उल्लंघन होने पर किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी आयोजन समिति की होगी।
बुधवार को पुलिस प्रशासन ने पूजा स्थल पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की, ताकि स्थिति पर नजर रखी जा सके और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को रोका जा सके। पुलिस की सख्ती और निगरानी के चलते इस वर्ष ग्राम पूजा के दौरान मुर्गा बलि की अमानवीय प्रथा नहीं हो सकी। पेटा इंडिया ने इस कार्रवाई के लिए पूर्वी सिंहभूम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पीयूष पांडेय, आईपीएस और जिला पुलिस टीम की सराहना की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक
