गुवाहाटी, 28 जनवरी (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) ने सत्ताधारी पार्टी भाजपानीत गठबंधन सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगाया। एपीसीसी ने पूरे राज्य में असंवैधानिक तरीके से वोट चोरी का आरोप लगाते हुए आज बोको-छयगांव सब-डिविजनल कमिश्नर के ऑफिस में विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित हरकतों के खिलाफ किया गया, जिन्होंने कथित तौर पर रात में सब-डिविजनल ऑफिस में घुसकर वोटर लिस्ट से नाम हटाने और जोड़ने में दखल दिया था। इस प्रदर्शन में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए।
यह विरोध कार्यक्रम कामरूप ज़िला कांग्रेस कमेटी की पहल पर, बोको और बोनगांव ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस मौके पर कामरूप ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष प्रणजीत चौधरी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता आरपी शर्मा और रमन्ना बरुवा, विधायक नंदिता दास और रकीबुद्दीन अहमद मौजूद थे।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए विधायक रकीबुद्दीन अहमद ने मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों से मुख्यमंत्री लगातार सार्वजनिक सभाओं में बयान दे रहे हैं कि मियां लोगों को सज़ा मिलनी चाहिए। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर यह टिप्पणी की कि अगर रिक्शे का किराया पांच रुपये है, तो अगर रिक्शा चलाने वाला मियां है तो किराया चार रुपये होना चाहिए। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने खुलेआम दावा किया है कि उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि जब भी संभव हो, चार से पांच लाख मियां लोगों के वोटिंग अधिकार खत्म कर दिए जाएं, और जब भी मौका मिले, उन्हें परेशान किया जाए।
रकीबुद्दीन अहमद ने कहा कि ऐसे बयान एक मुख्यमंत्री के लिए बिल्कुल शोभा नहीं देते। उन्होंने कहा कि उन लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार करना अस्वीकार्य है जो सैकड़ों सालों से असम की धरती पर रह रहे हैं और जो इस ज़मीन, इसकी संस्कृति, गरिमा और एकता से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह बोर असम है-श्रीमंत शंकरदेव और माधवदेव का असम, मां कामाख्या और हज़रत पीर अजान फकीर का असम। उन्होंने भाजपा पर असम में फूट डालने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि मुख्यमंत्री का एक खास समुदाय को परेशान करने और उनके वोट खत्म करने का बार-बार आह्वान निंदनीय है और लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत है। उन्होंने मुख्यमंत्री को ऐसे बयान देने से बचने की चेतावनी दी। विरोध प्रदर्शन खत्म होने के बाद, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव अधिकारियों से मुलाकात की और कथित गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय
