
कुजू ओपी पुलिस ने निषेधाज्ञा लगाने की अनुशंसा की
रामगढ़, 28 जनवरी (हि.स.)। रामगढ़ जिले के कुजू ओपी क्षेत्र में सांडी स्थित श्रीराम वाटिका की 40 डिसमिल जमीन पर आदिवासी समाज के लोगों ने विवाद किया। आदिवासियों ने कांग्रेसी नेता कुमार महेश सिंह और उनके पार्टनर मेहुल बसंत पर जमीन कब्जा करने का आरोप लगाया। यहां तक कि आदिवासी समाज के लोगों ने उस जमीन पर बने अपार्टमेंट और खाली जमीन पर सरना झंडा लगाने का भी प्रयास किया। बुधवार को इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई। कुमार महेश सिंह के पक्ष में जुटे लोगों ने पुलिस को बताया कि वे कानूनी तौर पर अपनी जमीन पर मौजूद हैं। लेकिन कुछ लोगों के द्वारा आदिवासी समाज को बरगला कर झूठे मामले में उन्हें उकसाया जा रहा है।
पुलिस ने निषेधाज्ञा की अनुशंसा की
मौके पर पहुंची को जो पुलिस ने तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए दोनों पक्षों से दस्तावेजों की मांग की। मामला तुल पकड़ता देख पुलिस ने उस जमीन पर धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू करने की अनुशंसा अनुमंडल पदाधिकारी से कर दी। कुजू ओपी पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच कई बार हिंसक संघर्ष होते-होते बचा।
केदारनाथ कंपनी के नाम पर बिकी जमीन
कुमार महेश सिंह और उनके पार्टनर मेहुल बसंत के नाम पर रजिस्टर्ड केदारनाथ कंपनी ने वर्ष 2018 में रामप्रवेश अग्रवाल से जमीन खरीदी थी। उससे पहले उनके पूर्वज रामेश्वर लाल अग्रवाल ने 1931 में जमीन खरीदी थी। यह जमीन विवाद करने वाले व्यक्ति प्रदीप मुंडा के पूर्वजों ने बेची थी। बाद में कई बार भू वापसी को लेकर प्रदीप मुंडा और उनके वंशजों ने विभिन्न न्यायालय में वाद दायर किया। लेकिन कहीं भी उन्हें उनके पक्ष में आदेश नहीं मिला। वर्ष 1970 में किए गए केस में भी प्रदीप मुंडा के वंशजों को हार माननी पड़ी। 1986 में भी केस दर्ज करने के बाद उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2004 में रामगढ़ अनुमंडल कोर्ट से प्रदीप मुंडा के पक्ष में फैसला सुनाया गया। लेकिन इस फैसले के खिलाफ रामप्रवेश अग्रवाल जब हजारीबाग एसी कोर्ट ने सभी आदेशों को निरस्त कर राम प्रवेश अग्रवाल के पक्ष में फैसला सुनाया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश
