नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स)। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने गुरुवार को एक अवधारणा नोट जारी किया है, जिसमें डिजाइन एक्ट, 2000 में बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि इसे वैश्विक सर्वोत्तम परीक्षण के साथ जोड़ा जा सके। इसका उद्देश्य भारत के डिजाइन संरक्षण ढांचे का आधुनिकीकरण करना और इसे अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाना है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक इस अवधारणा पत्र में भारत को रियाद डिजाइन कानून संधि (डीएलटी) और औद्योगिक डिजाइनों के अंतरराष्ट्रीय पंजीकरण से संबंधित समझौते में शामिल करने का भी प्रस्ताव है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि इन सुधारों का मकसद देश के डिज़ाइन प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क को मॉडर्न बनाकर ‘डिज़ाइन इन इंडिया, डिजाइन फॉर द वर्ल्ड’ विजन को आगे बढ़ाना है। डीपीआईआईटी ने आगे की चर्चा और संशोधनों के डिटेल डेवलपमेंट के लिए स्टेकहोल्डर्स से इन प्रस्तावों पर कमेंट्स और सुझाव मांगे हैं।

प्रस्तावों में ‘आर्टिकल’ और ‘डिजाइन’ की परिभाषा में भौतिक परिवर्तन करके वर्चुअल डिजाइनों को सुरक्षा प्रदान करना, 12 महीने की छूट अवधि की शुरुआत, डिजाइन के प्रकाशन को 30 महीने तक स्थगित करने का विकल्प, डिजाइन कानून संधि के अनुरूप समय सीमा में राहत प्रावधान की शुरुआत, वैधानिक क्षतिपूर्ति। संरक्षण की अवधि में संशोधन, एक ही आवेदन में कई डिजाइन फाइल करने की शुरुआत, आवेदनों के वर्गीकरण का विकल्प और डीएलटी और हेग समझौते के अनुरूप अन्य विविध परिवर्तन शामिल है।
उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग ने इसमें निहित प्रस्तावों पर हितधारकों से टिप्पणियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं, ताकि आगे की चर्चा और संशोधनों में सहायता मिल सके। अवधारणा पत्र सार्वजनिक परामर्श के लिए डीपीआईआईटी की आधिकारिक वेबसाइट और लिंक पर उपलब्ध है। https://www.dpiit.gov.in/static/uploads/2026/01/791a71ebde47d93b67560f7394be2fec.pdf
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर
