मंदसौर, 29 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को सीतामऊ में आयोजित तीन दिवसीय द्वितीय सीतामऊ साहित्य महोत्सव का शुभारंभ वर्चुअल माध्यम से किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सीतामऊ साहित्य महोत्सव सांस्कृतिक पुनरुत्थान का पर्व है, जिसमें सभी का हार्दिक स्वागत है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हजारों वर्षों से राष्ट्र एवं सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि का प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर का उन्नत शिखर एवं आकाश में लहराता ध्वज हमें गौरव की अनुभूति कराता है। इसी प्रकार सीतामऊ स्थित नटनागर शोध संस्थान विश्व एवं राष्ट्र की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है, जो तीर्थस्थल के समान है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि नटनागर शोध संस्थान की स्थापना वर्ष 1974 में सीतामऊ के महाराज कुमार श्री रघुवीर सिंह द्वारा की गई थी। आज यह संस्थान शोधार्थियों के लिए तीर्थस्थल के रूप में जाना जाता है। लगभग 30 हजार दुर्लभ पांडुलिपियों के संग्रह के कारण यह एशिया की प्रमुख लाइब्रेरी के रूप में विख्यात है। यहां भारत सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोधार्थी विभिन्न विषयों पर पीएचडी एवं शोध कार्य करते हैं।
उल्लेखनीय है कि द्वितीय सीतामऊ साहित्य महोत्सव का आयोजन सीतामऊ स्थित नटनागर शोध संस्थान परिसर में किया जा रहा है। देशभर से साहित्यकार, विद्वान, वक्ता, कलाकार एवं इतिहासकार महोत्सव में सहभागिता कर रहे हैं। इस महोत्सव को नॉलेज कुंभ के रूप में विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल माध्यम से महोत्सव में सहभागिता करते हुए इस पहल की सराहना की तथा इतिहास एवं साहित्य के इस महोत्सव की महत्ता को रेखांकित करते हुए समस्त प्रशासन को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया
