जयपुर, 29 जनवरी (हि.स.)। मत्स्य पालन से जुड़े कृषकों तथा मछुआरों की समस्याओं के समाधान तथा मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास के उद्देश्य से गुरुवार को मत्स्य कृषक संवाद कार्यक्रम का आयोजन टोंक रोड स्थित आरएलडीबी के सभागार में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता जवाहर सिंह बेढम, राज्य मंत्री, मत्स्य ने की। कार्यक्रम में शासन सचिव, पशुपालन एवं मत्स्य डॉ समित शर्मा तथा निदेशक संचिता विश्नोई सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में मत्स्य कृषक और मछुआरे उपस्थित थे।


मत्स्य राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि मत्स्य पालन आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है। राज्य सरकार मत्स्य कृषकों और मछुआरों के हितों की रक्षा तथा उनकी आय बढ़ाने की दिशा में प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। बेढम ने कहा कि इस प्रकार के कृषक संवाद कार्यक्रम सरकार और मत्स्य कृषकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करते हैं, जिससे जमीनी स्तर की वास्तविक समस्याओं को समझकर प्रभावी नीतियां बनाने में मदद मिलती है। उन्होंने मत्स्य कृषकों से नई तकनीकों को अपनाने और विभागीय योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, मत्स्य आहार की उपलब्धता तथा तालाब निर्माण जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मत्स्य कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकारी योजनाओं के माध्यम से अनुदान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य मंत्री ने मत्स्य बीमा योजना, ऋण सुविधा एवं विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि मत्स्य कृषकों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने विभाग को किसानों को विपणन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पोर्टल बनाने के निर्देश दिए जिस पर देश भर की मछली मंडियों की पूरी जानकारी उपलब्ध रहे। उन्होंने जयपुर में मत्स्य मंडी स्थापित करने के लिए भी कृषकों को आश्वासन दिया। मंत्री बेढम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विभाग में किसी भी प्रकार की छीजत स्वीकार नहीं की जाएगी।
इस अवसर पर शासन सचिव मत्स्य विभाग डॉ. समित शर्मा ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन संभावनाओं के मद्देनजर मत्स्य कृषकों के सर्वांगीण विकास के लिए योजनाबद्ध रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मत्स्य बीमा, ऋण सुविधा तथा विपणन व्यवस्था को मजबूत करना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद कार्यक्रम नीति निर्माण और क्रियान्वयन के बीच एक सेतु का काम करते हैं जिससे जमीनी स्तर की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी योजनाओं का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नियमित अंतराल पर वी सी के माध्यम से मत्स्य कृषकों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से करें। उन्होंने कृषकों के लिए ई ऑक्शन का प्रशिक्षण कराने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल
