चित्तौड़गढ़, 29 जनवरी (हि.स.)। चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभानसिंह आक्या ने गुरूवार को विधानसभा के प्रक्रिया एवं कार्यसंचालन के नियमो के नियम 50 के अंतर्गत स्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए आबकारी विभाग की और से किसानो से गत आठ साल में डोडे चुरे का हिसाब मांगने की प्रक्रिया को किसानो के साथ नाईंसाफी बताया।साथ ही सरकार से किसानो को उचित मुआवजा देने की मांग की।

विधायक आक्या ने विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा की मेवाड़ अंचल में अफीम की फसल ग्रामीण एवं शहर की अर्थव्यवस्था की प्रमुख धुरी रही है। लेकिन हाल ही में आबकारी विभाग के डोडा चुरा नष्ट करने के परिपत्र को लेकर किसानों के साथ बड़ी नाईंसाफी हो रही है। आबकारी विभाग किसानो से गत 8 साल का डोडा चुरे का हिसाब मांगा जा रहा है। अनुमान के मुताबिक अफीम के एक पट्टे पर प्रति वर्ष 60 किलो डोडे चुरे का उत्पादन होता है। ऐसे में 8 वर्ष का 4 क्विंटल 80 किलो डोडा चुरा नष्ट करने का अफीम किसानों को फरमान जारी किया जा रहा है।

विधायक आक्या ने विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से सरकार को संबोधित करते हुए कहा की पूर्व में सरकार द्वारा डोडा चुरा की खरीद की जाती थी लेकिन विगत कुछ वर्षो से सरकार द्वारा डोडा चुरा की खरीद नही की जा रही है। हर साल किसानो का डोडा चुरा नष्ट करने के लिए तोल कराने हेतु नोटिस निकाला जाता है। डोडा चुरा अधिकतम छह माह में स्वतः ही खराब हो जाता है। इसलिए किसानो ने पुराने डोडा चुरे को अपने खेतो में डाल खाद के रूप में इस्तेमाल कर लिया है। ऐसे में 8 साल का डोडा चुरा किसान कहां से लाकर देगा। आज इस फरमान से अफीम किसानों के सामने अपना पट्टा निरस्त होने से बचाने की एक चुनौती आ गई है। हमारा किसान ईमानदार है उसके पास 8 साल का डोडा चुरा मिलना असंभव है। आबकारी विभाग के इस फरमान को लेकर इसकी आड़ में किसानो से अवैध वसूली की मिली भगत की शिकायत भी सामने आ रही है। विधायक आक्या ने सरकार से आबकारी विभाग द्वारा जारी परिपत्र को निरस्त करने, पुराने नष्टीकरण नोटिस को खत्म करने व किसानो से डोडा चुरा की उचित दर पर खरीद कर उन्हे उचित मुआवजा देने की मांग की।
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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल
