शिमला, 29 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की चार कार्यशालाओं (वर्कशॉप) के निजीकरण के फैसले के खिलाफ निगम के तकनीकी कर्मचारियों ने विरोध तेज कर दिया है। एचआरटीसी तकनीकी कर्मचारी संगठन ने सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।

एचआरटीसी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में रामपुर, नालागढ़, पठानकोट और शिमला यूनिट-3 की कार्यशालाओं को निजी हाथों में देने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले के विरोध में शिमला में गुरुवार को आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान तकनीकी कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पूर्ण चंद ने कहा कि यह निर्णय निगम और कर्मचारियों दोनों के हित में नहीं है।

उन्होंने बताया कि एचआरटीसी में तकनीकी कर्मचारियों के 2267 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल करीब 1100 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। कर्मचारियों की भारी कमी के चलते निगम आउटसोर्स के जरिए भर्तियां कर रहा है, जिससे नियमित रोजगार के अवसर और कम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी कर्मचारी निगम की रीढ़ हैं और निजीकरण के जरिए इसी रीढ़ को कमजोर किया जा रहा है।
पूर्ण चंद ने कहा कि संगठन इस मुद्दे को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। उन्होंने साफ कहा कि यदि कार्यशालाओं के निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया गया तो संगठन प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।
प्रदेश में एचआरटीसी बसों की बढ़ती दुर्घटनाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि निगम की बसों के लिए अच्छी गुणवत्ता के स्पेयर पार्ट्स समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। स्पेयर पार्ट्स की कमी के कारण कई बार बसें बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को खतरा बढ़ जाता है।
तकनीकी कर्मचारी संगठन का कहना है कि यदि सरकार सच में निगम को मजबूत करना चाहती है तो निजीकरण के बजाय खाली पदों पर नियमित भर्तियां कर कार्यशालाओं को सशक्त बनाना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
