रांची, 29 जनवरी (हि.स.)। कुष्ठ रोग अब लाइलाज नहीं है। यदि समय पर इसकी पहचान कर इलाज शुरू कर दिया जाए, तो इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है और दिव्यांगता से भी बचा जा सकता है। यह बातें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने गुरुवार को कही। वें कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम को लेकर आयोजित राज्यस्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में बोल रहे थे।

यह कार्यक्रम नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के आरसीएच सभागार में आयोजित हुआ।

अभियान निदेशक ने कहा कि कुष्ठ रोगियों को छूने या उनके साथ रहने से यह बीमारी नहीं फैलती, इसी सोच को मजबूत करने के उद्देश्य से इस अभियान का नाम स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान रखा गया है। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी 2026 से राज्यभर में स्पर्श कुष्ठ जागरूकता पखवाड़ा की शुरुआत होगी, जो 13 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान गांव-गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर कुष्ठ रोग से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया जाएगा।
इस वर्ष अभियान की थीम भेदभाव का अंत और आत्मसम्मान सुनिश्चित करना है।
शशि प्रकाश झा ने बताया कि कुष्ठ रोग खोज अभियान का द्वितीय चरण 9 मार्च से 23 मार्च तक चलेगा। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले वर्ष अप्रैल तक राज्य में 5267 नए कुष्ठ मरीज चिन्हित किए गए हैं, जबकि 6587 रोगियों का वर्तमान में इलाज चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुष्ठ रोग की जांच, इलाज और दवाएं राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मी मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar
