जम्मू, 29 जनवरी (हि.स.)।

जम्मू और कश्मीर का पंजीकृत स्वयंसेवी संगठन रिसर्च एंड एडवोकेसी ग्रुप (आरएएजी) जो सामाजिक-कानूनी अनुसंधान और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत है ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) जम्मू के समक्ष एक याचिका दायर कर जम्मू शहर के प्रमुख यातायात चौराहों पर कथित तौर पर भीख मांगने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नाबालिग बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

इसी मुद्दे पर जम्मू के जिला मजिस्ट्रेट को सौंपी गई एक अलग शिकायत में संगठन ने जिला प्रशासन से बच्चों के शोषण को रोकने के लिए ठोस और एहतियाती कदम उठाने की मांग की है। अपनी याचिका में राग संगठन ने जम्मू शहर में बार-बार दिखने वाले और परेशान करने वाले दृश्य को उजागर किया है जिसमें महिलाएं सतवारी चौक, बिक्रम चौक और अन्य प्रमुख स्थानों पर वाहन चालकों से भीख मांगते हुए नवजात शिशुओं और बहुत छोटे बच्चों को गोद में लिए घूमती हैं। याचिका में संगठन ने आरोप लगाया है कि ये बच्चे लंबे समय तक कड़ाके की ठंड, भारी यातायात, वायु प्रदूषण और सड़क दुर्घटनाओं के निरंतर खतरे में रहते हैं जिससे उनके जीवन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान को गंभीर खतरा है।
आरएएजी की संस्थापक और सह-संयोजक अधिवक्ता माधवी सांब्याल ने याचिका प्रस्तुत की है जिसमें कहा गया है कि किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 2(14) के तहत भीख मांगते या भीख मांगने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे किसी भी बच्चे को देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाला बच्चा माना जाता है जिसके लिए वैधानिक अधिकारियों द्वारा तत्काल बचाव और हस्तक्षेप अनिवार्य है। शिकायत में आगे बताया गया है कि भीख मांगने के लिए बच्चे का इस्तेमाल अधिनियम की धारा 76 के तहत दंडनीय अपराध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता
