उरई, 29 जनवरी (हि.स.)। यमुना नदी को पुनर्जीवित करने और समाज को नदी संरक्षण से जोड़ने के एक महत्वाकांक्षी अभियान के तहत ‘जल सहेलियों’ की ‘अविरल निर्मल यमुना यात्रा’ का गुरुवार को पचनद संगम से औपचारिक शुभारंभ हुआ। यह पदयात्रा एक महीने तक चलेगी और पचनद से दिल्ली तक समाज को यमुना से जोड़ने तथा जनचेतना जगाने का प्रयास करेगी।

बता दें कि इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने शिरकत की। उन्होंने नदियों के प्राकृतिक स्वभाव पर जोर देते हुए कहा कि जहां पर्वतों, नदियों का संगम होता है, वहीं जीवन की संभावनाएं जन्म लेती हैं। नदियों का अपना स्वभाव और चरित्र होता है, इसलिए हमें नदियों को उनके प्राकृतिक स्वभाव के अनुसार बहने देना चाहिए।

जल सहेलियों के प्रयासों की सराहना करते हुए श्री पटेल ने कहा, जल संरक्षण के लिए जीवन समर्पित करने वाली जल सहेलियों का समाज सदैव ऋणी रहेगा। सरकार लगातार नदियों की अविरलता और निर्मलता के लिए काम कर रही है, अब समाज को उससे जुड़ने की आवश्यकता है। जब नीर-नारी-नदी समान होगी, तभी हम प्रकृति का संतुलन बनाए रख पाएंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्व प्रसिद्ध जल पुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि नदियों की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। उन्होंने कहा कि आज यह जिम्मेदारी जल सहेलियों ने अपने कंधों पर उठाई है। भारतीय संस्कृति में जल, नदी और नारी का सम्मान था, लेकिन आज गंदा पानी सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है। नदियों को खतरा केवल शहरी प्रदूषण से ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती रासायनिक खेती से भी है, जिसके प्रति जागरूकता जरूरी है।
जालौन के जिलाधिकारी राजेश पांडेय ने इस यात्रा को अत्यंत प्रेरणादायी बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि इस अभियान में शैक्षिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी नदी संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / विशाल कुमार वर्मा
