मीरजापुर, 29 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले में ड्रमंडगंज क्षेत्र के बबुरा कला गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन गुरुवार को भक्तिरस की अविरल धारा बही। कथा व्यास पंडित प्रेम मूर्ति महराज ने राजा जड़भरत, वामन अवतार और भक्त ध्रुव की कथाओं का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कथा व्यास ने कहा कि परमात्मा सर्वव्यापक हैं और कण-कण में विद्यमान हैं। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से अज्ञानता का नाश होता है। मानव जीवन सन्मार्ग की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि का दान मांगा और तीन पग में पूरे ब्रह्मांड को नाप लिया। इससे राजा बलि को अपने अभिमान का बोध हुआ और उन्होंने भगवान से क्षमा मांगकर उनकी शरण ग्रहण की।

भक्त ध्रुव की कथा के माध्यम से कथा व्यास ने बताया कि अल्पायु में भी सच्ची भक्ति से भगवान को प्रसन्न किया जा सकता है। ध्रुव की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन देकर परम पद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आज भी उत्तर दिशा में ध्रुव तारे के रूप में उनके दर्शन होते हैं जो अटूट भक्ति का प्रतीक है।
कथावाचक ने कहा कि भगवान सदैव अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं और सच्ची श्रद्धा से की गई भक्ति कभी निष्फल नहीं जाती। कथा के समापन पर श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती उतारी गई और प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा
