मीरजापुर, 29 जनवरी (हि.स.)। जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने जिला पर्यावरणीय समिति, जिला गंगा समिति तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा-4 एवं धारा-20 के अंतर्गत अधिसूचित वन भूमि के अमलदरामद की प्रगति की गुरूवार को समीक्षा की। इस दौरान आगामी वर्षाकाल 2026 में प्रस्तावित वृक्षारोपण महाअभियान की तैयारियों का आकलन किया गया और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने वृक्षारोपण कार्य में गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष जोर देते हुए सभी विभागों को वृक्षारोपण स्थलों की शत-प्रतिशत जीओ टैगिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही पौधों के चयन, सुरक्षा और नियमित देखभाल के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने को कहा। किसानों को फलदार और इमरती लकड़ी वाली प्रजातियों के पौधे वितरित करने तथा जैव विविधता संरक्षण के उद्देश्य से पीपल, पाकड़, गुलर, बरगद, नीम, महोगनी, जामुन जैसी प्रजातियों को शामिल करने पर बल दिया गया।

समीक्षा के दौरान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्यों की प्रगति का परीक्षण किया गया। इन सभी कार्यों को समाहित करते हुए अद्यतन रिपोर्ट जिला गंगा समिति एवं जिला पर्यावरण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। गंगा नदी में गिरने वाले नालों, एसटीपी की स्थिति तथा जिला गंगा समिति द्वारा चिह्नित प्रमुख मुद्दों पर भी प्रगति की समीक्षा की गई।
इसके अतिरिक्त वन भूमि के अमलदरामद की अद्यतन स्थिति का अवलोकन करते हुए जिलाधिकारी ने राजस्व और वन विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा
