नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)। आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार लगातार बदलती वैश्विक व्यापार नीतियों और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बीच भारत के इक्विटी बाजारों ने संतुलित लेकिन लचीला प्रदर्शन किया है। अप्रैल से दिसंबर 2025 की अवधि में निफ्टी-50 और बीएसई सेंसेक्स में क्रमशः लगभग 11.1 प्रतिशत और 10.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो बाजार की अंतर्निहित मजबूती को दर्शाती है।

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रस्तुत किया। सर्वे में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 2.35 करोड़ नए डीमैट खाते जोड़े गए, जिससे कुल डीमैट खातों की संख्या 21.6 करोड़ के पार पहुंच गई। सितंबर 2025 तक डीमैट खातों के साथ विशिष्ट निवेशकों की संख्या 12 करोड़ से अधिक हो गई, जिनमें लगभग एक-चौथाई महिलाएं हैं।

म्यूचुअल फंड निवेशकों का आधार भी तेजी से विस्तारित हुआ है। दिसंबर 2025 तक म्यूचुअल फंड में 5.9 करोड़ विशिष्ट निवेशक दर्ज किए गए, जिनमें 3.5 करोड़ निवेशक गैर-टियर-I और टियर-II शहरों से हैं। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में योगदान करने वाले निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2020 के लगभग 3.1 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 11 करोड़ से अधिक हो गई है।
सर्वेक्षण के अनुसार भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार वित्त वर्ष 2015 से 2025 के बीच लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा है। अस्थिर विदेशी पूंजी प्रवाह के बावजूद, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने विदेशी निवेश बहिर्गमन को संतुलित कर बाजार को सहारा दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा
